“देश के रक्षकों की हरी पहल — BSF परिसर में मियावाकी वन का शुभारंभ”

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“देश के रक्षकों की हरी पहल — BSF परिसर में मियावाकी वन का शुभारंभ”

-हरियाली के नए अध्याय की शुरुआत

नई दिल्ली/छावला/उमा सक्सेना/-     नई दिल्ली के छावला स्थित बीएसएफ की 25वीं बटालियन में 14 अक्टूबर 2025 की सुबह पर्यावरण के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम उठाया गया। यहां मियावाकी पद्धति से विकसित होने वाले हरित वन और फलदार पेड़ों के विस्तृत रोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

यह आयोजन सुबह लगभग 11 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ हुआ और 11 बजकर 30 मिनट तक चला। इस अवसर पर कॉस्मो फाउंडेशन ने शहीद कॉन्स्टेबल सुदीप सरकार की स्मृति में खेलगांव स्थित कीर्ति चक्र गनर्स पार्क में करीब 15,000 देशज पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी (IPS) मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी —
आईजी (मुख्यालय) एफएचक्यू अवतार सिंह शाही,
डीआईजी (मुख्यालय) प्रितपाल सिंह भट्टी,
डीआईजी पीएसओ एफएचक्यू वी.एम. सिंह,
साथ ही कॉस्मो फर्स्ट के सीएमडी अशोक जयपुरिया एवं कॉस्मो फाउंडेशन की प्रबंध न्यासी यामिनी जयपुरिया भी समारोह में शामिल हुईं।
25वीं बटालियन के कमांडेंट संदीप कुमार खत्री ने कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था का संचालन किया।

शहीद कर्नैल सिंह ऑडिटोरियम का उद्घाटन
मियावाकी और फलदार वनों के उद्घाटन के बाद सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर आरटीसी ग्राउंड में बने शहीद कर्नैल सिंह ओपन एयर ऑडिटोरियम का उद्घाटन महानिदेशक बीएसएफ श्री दलजीत सिंह चौधरी ने किया।
इस अवसर पर उन्होंने बीएसएफ जवानों से बातचीत की, उनके अनुभव सुने और उनके उत्साह एवं समर्पण की सराहना की।

जवानों की भागीदारी और संदेश
कार्यक्रम में कुल 12 अधिकारी, 22 अधीनस्थ अधिकारी और 120 अन्य रैंक के जवानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि सैनिकों और समाज को यह संदेश देना भी था कि सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान अब पर्यावरण की सुरक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक
बीएसएफ और कॉस्मो फाउंडेशन की इस साझेदारी ने यह साबित किया कि जब संगठन और समाज एक साथ पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो हरियाली केवल एक सपना नहीं बल्कि एक सतत सच्चाई बन जाती है।
इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न सिर्फ हरियाली से भर जाएगा, बल्कि प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल वातावरण का प्रतीक भी बनेगा।

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