दिल्ली हाईकोर्ट का अहम निर्णय: 18 साल पुराने अपहरण-दुष्कर्म मामले में सजा घटाई, दोष कायम

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October 20, 2026

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-लंबी न्यायिक प्रक्रिया, उम्र और जेल में बिताए समय को देखते हुए कोर्ट ने दी राहत

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राजधानी दिल्ली से जुड़े वर्ष 2008 के अपहरण और दुष्कर्म प्रकरण में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्णय सुनाते हुए दोषसिद्धि को यथावत रखते हुए आरोपी की सजा को पहले से काटी गई जेल अवधि तक सीमित कर दिया है। यह अपील साकेत कोर्ट द्वारा 9 नवंबर 2010 को दिए गए दोषसिद्धि आदेश और 10 नवंबर 2010 को घोषित सजा के खिलाफ दाखिल की गई थी। निचली अदालत ने आरोपी रवि कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत पांच वर्ष और धारा 376 के अंतर्गत सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

अभियोजन के अनुसार, 25 अप्रैल 2008 को वसंत कुंज थाने में दर्ज शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल की रात शौच के लिए बाहर निकलते समय आरोपी ने उसे जबरन वाहन में बैठाया और वाटर बोर्ड कार्यालय के पास ले जाकर यौन उत्पीड़न किया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान को भरोसेमंद मानते हुए कहा कि उसके कथन में लगातार एकरूपता रही और घटना के तुरंत बाद परिवार को जानकारी देना उसके आरोपों को मजबूत करता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सहमति का कोई संकेत नहीं मिला, जिससे बचाव पक्ष की दलील कमजोर पड़ गई।

हालांकि आरोपी की ओर से झूठा फंसाए जाने और स्वतंत्र गवाह न होने का तर्क रखा गया, लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया। सजा में कमी पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि मामला 2013 के आपराधिक कानून संशोधन से पहले का है, जब विशेष परिस्थितियों में कम सजा देने का प्रावधान मौजूद था। साथ ही आरोपी की उम्र, तीन साल से अधिक जेल में बिताया समय, अन्य आपराधिक रिकॉर्ड का अभाव और करीब 18 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए सजा में राहत देना उपयुक्त समझा गया।

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अपराध गंभीर है और दोष बरकरार रहेगा, लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद आरोपी को दोबारा जेल भेजना न्यायसंगत नहीं होगा। इस फैसले को न्यायिक संतुलन और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण माना जा रहा है।

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