दिल्ली में सेक्सटॉर्शन साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

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दिल्ली में सेक्सटॉर्शन साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

-अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर गुरुद्वारे के सेवादार से ऐंठे 14.63 लाख रुपये; पुलिस और यूट्यूब अधिकारी बनकर देते थे गिरफ्तारी की धमकी, 15 अन्य साइबर ठगी की शिकायतें भी जुड़ीं

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। दिल्ली पुलिस की उत्तर जिला साइबर सेल ने सेक्सटॉर्शन के जरिए साइबर ठगी करने वाले कथित संगठित मेवाती गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर अश्लील वीडियो के नाम पर लोगों को ब्लैकमेल करने, खुद को पुलिस अधिकारी और यूट्यूब प्रतिनिधि बताकर गिरफ्तारी की धमकी देने तथा ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में एक पीड़ित से 14,63,999 रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जबकि संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े 15 अन्य साइबर ठगी के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।

गुरुद्वारे के सेवादार को बनाया निशाना

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता मनजीत सिंह एक गुरुद्वारे में सेवादार हैं। उन्हें व्हाट्सऐप पर एक अश्लील वीडियो मिला था। इसके बाद साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया और खुद को गुरुग्राम पुलिस का अधिकारी तथा यूट्यूब का प्रतिनिधि बताया। आरोपियों ने दावा किया कि वीडियो देखने के कारण उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो गया है। साथ ही धमकी दी कि यदि वीडियो को यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों से हटवाने तथा कथित एफआईआर से नाम निकलवाने के लिए पैसे नहीं दिए गए, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस के अनुसार, डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 11 सितंबर 2025 से 27 सितंबर 2025 के बीच अपने और अपने भतीजे के बैंक खातों से कई बार रकम ट्रांसफर की। इस तरह आरोपियों ने कथित तौर पर कुल 14,63,999.19 रुपये ऐंठ लिए। बाद में एक रिश्तेदार से बातचीत करने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर पुलिस और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

करीब 100 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर जिला साइबर पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की। एसआई सुमित कुमार के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल राम किशन और कांस्टेबल मोहिन अली की टीम गठित की गई। टीम ने इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, एसीपी ऑपरेशंस विशेष धत्तरवाल और अतिरिक्त डीसीपी राम दुलेश मीणा के मार्गदर्शन में कार्रवाई की।

जांच के दौरान करीब 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े आईएमईआई नंबरों का विश्लेषण किया गया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईपी लॉग और अन्य तकनीकी जानकारियों के साथ बैंक खातों में हुए लेनदेन की जांच की गई। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी निगरानी के आधार पर राजस्थान के डीग जिले के गांव कलतरिया और आसपास के इलाकों से इस नेटवर्क के तार जुड़े होने के संकेत मिले।

ठगी की रकम कई बैंक खातों में भेजी

पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़ित से ठगी गई रकम कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेजी गई थी। इनमें राजस्थान के अलवर निवासी अंकित सैन के नाम पर दर्ज एक्सिस बैंक खाते में 1,80,499 रुपये ट्रांसफर होने का पता चला। पंजाब के लुधियाना निवासी मोहम्मद शारिक खान के नाम पर दर्ज यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते में 2.22 लाख रुपये और आईसीआईसीआई बैंक खाते में 2.20 लाख रुपये भेजे गए।

इसके अलावा, लुधियाना निवासी तसलीम राजा के नाम पर दर्ज सीएसबी बैंक खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के एक खाते में भी 50 हजार रुपये भेजे जाने की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किए जाने का संदेह है।

इमरान खान को गिरोह का प्रमुख सदस्य बताया

पूछताछ के दौरान राजस्थान के डीग जिले के जुर्हेरा निवासी 28 वर्षीय इमरान खान की भूमिका कथित गिरोह के अहम सदस्य के रूप में सामने आई। पुलिस का आरोप है कि वह ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते, सिम कार्ड और मोबाइल फोन की व्यवस्था करता था। इसके अलावा, बैंक खातों में आने वाली रकम निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने में भी उसकी भूमिका थी।

जांच के मुताबिक, इमरान ने अलवर में अंकित सैन का बैंक खाता खुलवाने में मदद की थी। इसके बदले अंकित को 3,500 रुपये देने की बात सामने आई है। आरोप है कि खाते का एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक इमरान ने अपने पास रखे तथा खाते में रकम आने के बाद उसे निकालकर अपने सहयोगियों तक पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, इमरान ने समद खान के माध्यम से अन्य बैंक खातों की व्यवस्था भी की थी। लुधियाना निवासी तसलीम राजा ने पूछताछ में बताया कि उसकी और समद खान की इमरान से ऑनलाइन गेम पबजी के जरिए पहचान हुई थी। जांच में इमरान की अलवर और लुधियाना में मौजूदगी से जुड़े तकनीकी साक्ष्य मिलने का भी दावा किया गया है।

ऐसे देते थे साइबर ठगी को अंजाम

पुलिस की जांच में गिरोह के कथित काम करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कुछ सदस्य संभावित पीड़ितों के मोबाइल नंबर तलाशते थे, जबकि अन्य अश्लील वीडियो कॉल के जरिए उन्हें फंसाते और बाद में पुलिस या सोशल मीडिया प्रतिनिधि बनकर धमकाते थे।

जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ‘फ्रेंड्स सर्च’ एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर अलग-अलग शहरों के मोबाइल नंबर खोजते थे। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के दौरान दूसरे मोबाइल फोन पर पहले से रिकॉर्ड किया गया अश्लील वीडियो चलाया जाता था, जिससे सामने वाले व्यक्ति को वास्तविक वीडियो कॉल होने का भ्रम होता था। कॉल रिकॉर्ड करने के बाद पीड़ित को उसी वीडियो के आधार पर ब्लैकमेल किया जाता था।

इसके बाद गिरोह का एक अन्य सदस्य कथित तौर पर पुलिस अधिकारी या यूट्यूब प्रतिनिधि बनकर संपर्क करता था। पीड़ित को गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई और सामाजिक बदनामी का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते थे। रकम प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें अलग-अलग लोगों के नाम पर खुलवाया गया था।

एक करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की जांच

उत्तर जिला पुलिस के अनुसार, संदिग्ध लाभार्थी बैंक खातों से देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 15 साइबर ठगी की शिकायतों के तार जुड़े हैं। इन खातों में कुल जमा और निकासी का लेनदेन एक करोड़ रुपये से अधिक पाया गया है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क ने अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमरान खान (28), निवासी जुर्हेरा, जिला डीग, राजस्थान; समद खान (32), निवासी लुधियाना, पंजाब; तसलीम राजा (32), निवासी लुधियाना, पंजाब; और अंकित सैन, निवासी अलवर, राजस्थान के रूप में हुई है।

पुलिस ने तीन मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश, ठगी की पूरी रकम का पता लगाने और अतिरिक्त बैंक खातों तथा पीड़ितों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।

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