नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- दिल्ली सरकार महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वर्ष 2019 से लागू पिंक टिकट व्यवस्था को अब समाप्त कर 2026 से ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ लागू किया जाएगा। इस बदलाव का मकसद टिकटिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाना और योजना के दुरुपयोग को रोकना है। नई व्यवस्था के तहत डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा के लिए महिलाओं को स्मार्ट कार्ड का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
आधार से होगी पहचान, फर्जी लाभार्थियों पर लगेगी रोक
सरकार के अनुसार, पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली पते वाला आधार कार्ड अनिवार्य होगा। यह कार्ड 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र की सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए जारी किया जाएगा। कार्ड में यात्री की पहचान से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मुफ्त यात्रा का लाभ केवल वास्तविक पात्र महिलाओं को ही मिले।
डिजिटल टिकटिंग से आसान होगी यात्रा प्रक्रिया
नई प्रणाली में महिलाओं को बस में चढ़ते समय इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन पर स्मार्ट कार्ड टैप करना होगा। इससे कागजी टिकट की जरूरत खत्म हो जाएगी और टिकटिंग प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी बनेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से संचालन में सुधार होगा और राजस्व से जुड़े आंकड़ों की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।
तीन तरह के स्मार्ट कार्ड लाने की तैयारी
दिल्ली सरकार की योजना सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। परिवहन विभाग 2026 में कुल तीन तरह के स्मार्ट कार्ड लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड: केवल महिलाओं के लिए, जिसके जरिए डीटीसी और क्लस्टर बसों में पूरी तरह मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।
विशेष स्मार्ट कार्ड: वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और मौजूदा बस पास धारकों के लिए, जिनमें रियायती या विशेष सुविधाएं शामिल होंगी।
जनरल स्मार्ट कार्ड: सभी यात्रियों के लिए, जिसे मेट्रो कार्ड की तरह रिचार्ज कर बसों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की पहल
सरकार का कहना है कि स्मार्ट कार्ड प्रणाली से दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक एकीकृत और आधुनिक बनेगी। एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग श्रेणियों के यात्रियों को सुविधाएं देने से न सिर्फ यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि परिवहन तंत्र की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। 2026 में लागू होने वाला यह बदलाव दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक अहम सुधार माना जा रहा है।


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