गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर आरजेएस का भावपूर्ण आयोजन

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May 7, 2026

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-साहिबजादों के बलिदान को नमन

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 359वें प्रकाश पर्व और वीर बाल दिवस के अवसर पर राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) एवं आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। यह आरजेएस का 510वां वेबिनार था, जिसे मध्य प्रदेश के नायरा राजगढ़ से ग्राम पंचायत सचिव जगदीश चंद्र मालवीय के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया।

17वीं सदी की वीरता से 21वीं सदी के सकारात्मक भारत तक का सेतु
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल इतिहास को स्मरण करना नहीं, बल्कि गुरु परंपरा की शिक्षाओं को आज के समय से जोड़ना रहा। वक्ताओं ने 17वीं शताब्दी के शौर्य, त्याग और राष्ट्रधर्म को 21वीं सदी के सशक्त, जागरूक और सकारात्मक भारत के रोडमैप से जोड़ने पर जोर दिया। इसी क्रम में यह घोषणा भी की गई कि 31 दिसंबर को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में प्रो. के.जी. सुरेश के सानिध्य में आरजेएस की मीडिया लिटरेसी वर्कशॉप और न्यूज़लेटर का लोकार्पण किया जाएगा।

खालसा पंथ की विरासत: मानवता और राष्ट्र प्रथम का संदेश
आरजेएस पीबीएच के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी की विरासत भारतीय मूल्यों की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने बताया कि गुरु जी ने मात्र नौ वर्ष की आयु में नेतृत्व संभालकर ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘धर्म की रक्षा’ का मार्ग प्रशस्त किया। खालसा पंथ की स्थापना का उद्देश्य हर उस व्यक्ति को शक्ति देना था, जो अन्याय और अत्याचार के सामने खुद को असहाय महसूस करता है।

सार्वजनिक सेवा में गुरु संदेश की प्रेरणा
कार्यक्रम के सह-आयोजक एवं ग्राम पंचायत सचिव जगदीश चंद्र मालवीय ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का संदेश आज की सार्वजनिक सेवा में भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित होकर उन्होंने हजारों ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का साहस हमें ईमानदारी और निष्ठा के साथ समाज सेवा करने की प्रेरणा देता है।

साहिबजादों की शहादत: आत्मबल और स्वाभिमान की मिसाल
पटियाला, पंजाब से आए ‘फ्रीडम फाइटर्स सक्सेसर्स डिस्ट्रिक्ट ऑर्गनाइजेशन’ के अध्यक्ष जगदीप सिंह सिद्धू ने चमकौर के युद्ध और बड़े साहिबजादों—अजीत सिंह और जुझार सिंह—की वीरगति पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं संगठन के कोषाध्यक्ष जसवीर सिंह धीमान ने छोटे साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत का भावुक वर्णन करते हुए इसे आत्मा की विजय की कहानी बताया।

अमृत पीढ़ी और तकनीक का संगम
कार्यक्रम में युवा पीढ़ी की भागीदारी भी विशेष आकर्षण रही। छात्रा करुणा मालवीय और देवन ने अपने सपनों को साझा किया। इस दौरान उदय कुमार मन्ना ने युवाओं को संदेश दिया कि प्राचीन गुरु ज्ञान को आधुनिक तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), के साथ जोड़कर ही भविष्य का भारत सशक्त बनेगा। उन्होंने निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प को सफलता की कुंजी बताया।

मीडिया साक्षरता और डिजिटल विरासत पर जोर
आरजेएस ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने की अपनी पहल की जानकारी दी। गुरु गोविंद सिंह जी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की यात्राओं और चर्चाओं को डिजिटल डेटा लाइब्रेरी में संजोने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रम और दुष्प्रचार से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता को आवश्यक बताया गया।

कला, कविता और संगीत के माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव
कार्यक्रम में कबीर भजन गायक दयाराम सारोलिया, कवयित्री रति चौबे और जादूगर जितेंद्र सिंह बब्बर सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से राष्ट्रीय एकता, सकारात्मक सोच और मानवता का संदेश दिया। कवयित्री रति चौबे ने साहिबजादों को भारत की शान बताते हुए प्रेरक कविता का पाठ किया।

सकारात्मक भारत की ओर संकल्प
510वें वेबिनार का समापन 2047 तक ‘सकारात्मक भारत’ के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उदय कुमार मन्ना ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 23 जनवरी पराक्रम दिवस और बसंत पंचमी के अवसर पर ‘टीम रिपब्लिक डे 2026’ और अन्य राष्ट्रनिर्माण पहलों की शुरुआत की जाएगी।

कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि गुरु गोविंद सिंह जी और उनके साहिबजादों का बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज और आने वाले कल के भारत के लिए सतत प्रेरणा है।

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