नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- राजधानी में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर दिल्ली पंचायत संघ ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। संघ ने दिल्ली के पर्यावरण मंत्री से अपील की है कि हालात को देखते हुए तत्काल “प्रदूषणकालीन अवकाश” घोषित किया जाए, ताकि दिल्ली को सामान्य प्रदूषण स्तर पर लाया जा सके। पंचायत संघ का कहना है कि केवल पेट्रोल-डीज़ल वाहनों पर अचानक प्रतिबंध लगाकर समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि इससे दिल्ली देहात में रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और गरीब तबके को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वाहन प्रतिबंध से ग्रामीण इलाकों पर असर
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि बी-2, बी-3 और बी-4 श्रेणी की गाड़ियों पर लगाए गए प्रतिबंध ग्रामीण क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों से गांवों में रहने वाले लोग आपातकालीन परिस्थितियों में भी फंस सकते हैं। यादव ने कहा कि सरकार को प्रतीकात्मक और एकतरफा कदम उठाने के बजाय ज़मीनी हकीकत को समझते हुए व्यावहारिक नीतियां बनानी चाहिए।
पर्यावरण मंत्री के सामने रखीं पांच अहम मांगें
पंचायत संघ ने प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार के समक्ष पांच ठोस मांगें रखी हैं। इनमें सबसे पहले फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर फैले अवैध कब्जों को हटाने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि जब तक प्रदूषण सामान्य स्तर पर नहीं आता, तब तक ऐसे सभी अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अवैध पार्किंग और विज्ञापन बोर्ड हटाने पर जोर
संघ ने फुटपाथों पर हो रही अवैध पार्किंग और अनधिकृत विज्ञापन बोर्डों को भी प्रदूषण और अव्यवस्था की बड़ी वजह बताया है। उनका कहना है कि इन्हें तुरंत हटाया जाए, ताकि पैदल चलने वालों को सुरक्षित और खुला रास्ता मिल सके।
स्कूल अवकाश नीति में बदलाव की मांग
दिल्ली पंचायत संघ ने स्कूलों की छुट्टियों की नीति में भी बदलाव का सुझाव दिया है। संघ का प्रस्ताव है कि ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में कटौती कर शीतकालीन अवकाश बढ़ाया जाए और सबसे अधिक प्रदूषण वाले दिनों को इसमें शामिल किया जाए। जब तक वायु गुणवत्ता सामान्य नहीं होती, तब तक इस व्यवस्था को लागू रखा जाए।
इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिल को बढ़ावा
संघ ने दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए तत्काल 40 प्रतिशत सब्सिडी घोषित करने की मांग की है, ताकि लोग स्वेच्छा से स्वच्छ परिवहन की ओर बढ़ें। इसके साथ ही सरकारी अधिकारियों को प्रोत्साहन देकर साइकिल से कार्यालय आने के निर्देश देने की भी बात कही गई है, जिससे प्रदूषण कम करने का वास्तविक उदाहरण सामने आ सके।
केवल प्रतिबंध नहीं, स्थायी समाधान जरूरी
दिल्ली पंचायत संघ ने साफ कहा है कि सिर्फ पेट्रोल-डीज़ल वाहनों पर रोक लगाना या PUC सर्टिफिकेट के बिना ईंधन न देना प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं है। संघ का मानना है कि जब तक समग्र और व्यावहारिक कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक राजधानी को प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है।


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