ट्रंप के मंत्री के विवादित बोल: भारत समेत कई देशों को ‘सुधारने’ की बात

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ट्रंप के मंत्री के विवादित बोल: भारत समेत कई देशों को ‘सुधारने’ की बात

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही टैरिफ विवाद को लेकर तनाव बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने भारत, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि इन्हें “सुधारने” की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में तल्खी और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

टैरिफ विवाद के बीच आया बयान
लुटनिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि कोई देश अमेरिकी बाजार तक पहुंच चाहता है, तो उसे वॉशिंगटन की शर्तें माननी होंगी। उन्होंने भारत और ब्राजील पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ये देश अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए अपने बाजार को खोलें और अमेरिका के हितों के खिलाफ कदम उठाना बंद करें। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल की खरीद पर 25% शुल्क शामिल है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे शुल्कों में गिना जा रहा है।

भारत का रुख: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित और बाजार की स्थिति पर आधारित है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया। सरकार का कहना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। यही वजह है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया।

व्यापारिक रिश्तों में मजबूती बरकरार
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते मजबूत बने हुए हैं। वर्ष 2024-25 में अमेरिका लगातार चौथे साल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। इस दौरान दोनों देशों के बीच 131.84 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। यह दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर सहयोग जारी है।

500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
द्विपक्षीय समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि व्यापार समझौते का पहला चरण अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा। भारत और अमेरिका ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क का दौरा किया था। वहीं 16 सितंबर को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के अधिकारी भी भारत पहुंचे थे और दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी।

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