मानसी शर्मा /- चुनाव आयोग ने लोकतंत्र की नींव को मजबूती देने के लिए एक जरूरी कदम उठाया है। वोटर लिस्ट से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया में अब धोखाधड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। दरअसल, आयोग ने ई-साइन (e-Sign) सुविधा को लॉन्च किया है। इस तकनीकी सुविधा से मतदाता पहचान के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। यह बदलाव हाल ही में कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में हुई अनियमितताओं के आरोपों के बाद आया है, जहां बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कोशिशें सामने आई थीं।
आलंद कांड ने खोली धोखाधड़ी की पोल
बता दें, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आलंद विधानसभा सीट पर 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले लगभग 6,000 वोटरों के नाम हटाने की साजिश का खुलासा किया था। आरोप था कि कुछ लोगों ने दूसरों की पहचान का गलत इस्तेमाल करके फॉर्म 7 (नाम हटाने की आपत्ति) दाखिल किए थे और ओटीपी के लिए नकली मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया था।
जिसके बाद चुनाव आयोग ने तुरंत जांच की, जिसमें 6,018 आपत्तियों में से केवल 24 को वैध पाया गया। बाकी सभी को खारिज कर दिया गया, क्योंकि प्रभावित वोटर अभी भी उसी स्थान पर रह रहे थे। इस मामले में FIR भी दर्ज की गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई भी नाम ऑनलाइन हटाया नहीं जा सकता, बिना प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए। 19 सितंबर को जारी प्रेस नोट में आयोग ने घोषणा की कि जनता द्वारा ऑनलाइन कोई नाम हटाने की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। इसी कड़ी में ई-साइन सिस्टम को ईसीआईनेट पोर्टल से जोड़ा गया है, जो धोखाधड़ी रोकने का एक मजबूत हथियार साबित होगा।
ई-साइन सिस्टम कैसे काम करेगा?
ई-साइन सिस्टम वोटर रजिस्ट्रेशन, संशोधन या आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाता है। यह फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ना), फॉर्म 7 (नाम हटाना या आपत्ति) और फॉर्म 8 (संशोधन) के लिए लागू होगा।
- फॉर्म भरना:वोटर ईसीआईनेट पोर्टल या ऐप पर जाकर संबंधित फॉर्म भरते हैं। इसमें नाम, पता और आधार नंबर जैसी जानकारी दर्ज करनी होती है।
- आधार-लिंक्ड वेरिफिकेशन:फॉर्म सबमिट करने से पहले, उपयोगकर्ता को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी) के बाहरी पोर्टल पर रीडायरेक्ट किया जाता है। यहां आधार नंबर डालना पड़ता है।
- OTP जनरेट और सहमति:आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। उपयोगकर्ता ओटीपी डालकर आधार-आधारित प्रमाणीकरण की सहमति देते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि फॉर्म भरने वाले का नाम वोटर कार्ड और आधार से मेल खाता हो, और मोबाइल नंबर भी आधार से लिंक्ड हो।
- फाइनल सबमिशन:वेरिफिकेशन सफल होने पर ही फॉर्म ईसीआईनेट पर वापस सबमिट होता है। असफल होने पर प्रक्रिया रद्द हो जाती है।


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