चंद्रयान-3 की सफलता से ब्रिक्स सम्मेलन में छाए पीएम मोदी,

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चंद्रयान-3 की सफलता से ब्रिक्स सम्मेलन में छाए पीएम मोदी,

-दुनियाभर के नेताओं से मिली बधाइयां

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/जोहांसबर्ग/शिव कुमार यादव/- बुधवार को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बैंक्वेट डिनर का आयोजन किया गया। इस डिनर कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी आकर्षण का केंद्र रहे। दरअसल भारत के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद दुनिया भर के नेताओं ने पीएम मोदी को बधाई और शुभकामनाएं दीं। अधिकतर नेता पीएम मोदी से मिलकर उन्हें मिशन की सफलता की बधाई दे रहे थे। इनमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल रहीं।

इंडियन डायस्पोरा में दिखा गजब का उत्साह
चंद्रयान मिशन की सफलता से प्रधानमंत्री मोदी भी काफी उत्साहित दिखे। मिशन की सफलता पर प्रधानमंत्री ने दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय मूल के समुदाय के उत्साह की भी तारीफ की। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि ’वह चंद्रयान-3 की सफलता के जोश को जोहानिसबर्ग में भी महसूस कर रहे हैं। भारत की उपलब्धि पर दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय मूल के समुदाय का उत्साह देखकर बहुत खुशी हुई।’ प्रधानमंत्री ने जोहानिसबर्ग के होटल में भारतीय मूल के लोगों से मिलते हुए अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की।

भारत ने रचा इतिहास
बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का चंद्रयान-3 मिशन सफल  हो गया है। मिशन के लैंडर विक्रम ने बुधवार को चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान भी सफलतापूर्वक बाहर आ गया है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। वहीं चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।

पीएम मोदी ने इसरो चेयरमैन को फोन कर दी बधाई
चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। बुधवार को जैसे ही चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर ने चांद की सतह पर लैंड किया पूरा भारत खुशी से झूम उठा। पूरी दुनिया में  भारत की इस उपलब्धि की चर्चा हुई। मिशन की सफलता के बाद पीएम मोदी ने जोहानिसबर्ग से ही इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ को फोन कर मिशन की सफलता पर बधाई दी और कहा कि संभव हुआ तो वह जल्द इसरो मुख्यालय आकर पूरी टीम से मिलेंगे। प्रधानमंत्री फिलहाल ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर हैं।

जयशंकर ने शेयर की पीएम मोदी की तस्वीर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने एक्स अकाउंट पर ब्रिक्स सम्मेलम के दौरान की पीएम मोदी की एक तस्वीर साझा की है। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है, ’आज सुबह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में’।

ब्रिटेन बोला- इतिहास बन गया
ब्रिटेन की स्पेस एजेंसी यूकेएसए ने भारत से कहा कि आपने तो इतिहास रच दिया। विज्ञान के क्षेत्र में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के लिए इंडिया को बधाई।

इजराइल के ऐंबैस्डर नाओर गिलोन
इजराइल के ऐंबैस्डर नाओर गिलोन ने कहा कि इसरो और भारत को दिल से बधाई। चंद्रयान-3 की यह उपलब्धि इसलिए भी अतुलनीय है क्योंकि चांद के साउथ पोल पर अभी तक कोई दूसरा देश नहीं पहुंच सका था। आपकी यह कामयाबी हम सभी को भी चांद के दक्षिण ध्रुव तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगी।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने बधाई दी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि चांद के साउथ पोल पर पहुंचने पर भारत को बधाई। इस मिशन में शामिल सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए यह एक अविश्वसनीय उपलब्धि है। इस मिशन पर पार्टनर बनने पर हमें गर्व है।

नेपाल के विदेश मंत्री ने खुशी जताई
नेपाल के विदेश मंत्री एनपी सौद ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए भारत को हार्दिक बधाई। यह न केवल हमारे भारतीय दोस्तों के लिए राष्ट्रीय गौरव का क्षण है, बल्कि स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी की प्रगति में मील का पत्थर भी है। जो हमारे जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देगा।’

ऑस्ट्रेलियन स्पेस एजेंसी ने बधाई दी
ऑस्ट्रेलियन स्पेस एजेंसी ने लिखा कि इसरो ने चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। यह मिशन मानव जाति को चांद को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इस सफलता के लिए इसरो को बधाई।

मालदीव के विदेश मंत्री की बधाई
मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने लिखा कि भारत ने रचा इतिहास। पड़ोसी के रूप में हमें चंद्रमा के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग पर गर्व है। यह पूरी मानवता के लिए एक सफलता है। स्पेस में खोज के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। इतिहास बनाने के लिए भारत को बधाई।

पीएम मोदी बोले- चंदा मामा अब दूर के नहीं, एक टूर के
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा- यह क्षण भारत के सामर्थ्य का है। यह क्षण भारत में नई ऊर्जा, नए विश्वास, नई चेतना का है। अमृतकाल में अमृतवर्षा हुई है। हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया। हम अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने हैं।

साउथ पोल पर ही मिशन क्यों भेजा गया?
चंद्रमा के पोलर रीजन दूसरे रीजन्स से काफी अलग हैं। यहां कई हिस्से ऐसे हैं जहां सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती और तापमान -200 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक चला जाता है। ऐसे में वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यहां बर्फ के फॉर्म में अभी भी पानी मौजूद हो सकता है। भारत के 2008 के चंद्रयान-1 मिशन ने चंद्रमा की सतह पर पानी की मौजूदगी का संकेत दिया था।
             इस मिशन की लैंडिंग साइट चंद्रयान-2 जैसी ही है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 70 डिग्री अक्षांश पर। लेकिन इस बार एरिया बढ़ाया गया है। चंद्रयान-2 में लैंडिंग साइट 500 मीटर गुणा 500 मीटर थी। अब, लैंडिंग साइट 4 किमी गुणा 2.5 किमी है।
             अगर सब कुछ ठीक रहा तो चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला स्पेसक्राफ्ट बन जाएगा। चंद्रमा पर उतरने वाले पिछले सभी स्पेसक्राफ्ट भूमध्यरेखीय क्षेत्र में, चंद्र भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में कुछ डिग्री अक्षांश पर उतरे हैं।

14 दिन का ही मिशन क्यों?
इसरो के एक्स साइंटिस्ट मनीष पुरोहित ने बताया कि चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक उजाला रहता है। जब यहां रात होती है तो तापमान -100 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है। चंद्रयान के लैंडर और रोवर अपने सोलर पैनल्स से पावर जनरेशन करेंगे। इसलिए वो 14 दिन तो पावर जनरेट कर लेंगे, लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन प्रोसेस रुक जाएगी। पावर जनरेशन नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड को झेल नहीं पाएंगे और खराब हो जाएंगे।

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