महापंचायत का ऐलान, नजफगढ़ देहात में नहीं बनने देंगे कूड़े के पहाड़

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November 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-राव सतबीर के नेतृत्व में गांव की सरदारी एकजुट, शिकारपुर के सोहन त्यागी, नजफगढ़ के करतार सिंह, पालम 360 के प्रधान रामकुमार सोलंकी सहित गणमान्य लोग रहे मौजूद; भाजपा सरकार की देहात व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ महापंचायत हुई

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/विजय त्यागी एडिटर। राजधानी दिल्ली के मटियाला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घुम्मनहेड़ा गांव में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में पालम 360 के प्रधान रामकुमार सोलंकी, समाजसेवी राव सतबीर सहित गांव की समस्त सरदारी और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया। इस दौरान गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के पर्यावरण, जनहित तथा किसानों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि घुम्मनहेड़ा गांव और आसपास के क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ किसी भी कीमत पर नहीं बनने दिए जाएंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांव की जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर कूड़े के पहाड़ बनाने की किसी भी योजना का विरोध करने का संकल्प लिया।

इस पंचायत में पालम 360 के प्रधान रामकुमार सोलंकी,शिकारपुर गांव से सोहन त्यागी, नजफगढ़ से करतार सिंह तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र में कूड़े का पहाड़ नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र के पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा विषय है।

इसके साथ ही पंचायत में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रिपल इंजन भाजपा सरकार की कथित देहात एवं किसान विरोधी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक बड़ी पंचायत आयोजित करने पर भी सहमति बनी। ग्रामीणों का कहना था कि गांवों की समस्याओं, किसानों के हितों और ग्रामीण क्षेत्र के अधिकारों की लगातार अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंचायत में उपस्थित लोगों ने एकजुटता का परिचय देते हुए कहा कि ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए दिल्ली देहात के सभी गांवों की सरदारी को साथ लेकर आवाज बुलंद की जाएगी। पंचायत से यह संदेश दिया गया कि गांव की जमीन, पर्यावरण और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामीण पूरी मजबूती से एकजुट हैं और इस लड़ाई को मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा।

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