कृषि विज्ञान केंद्र उजवा में मनाया महिला किसान दिवस

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कृषि विज्ञान केंद्र उजवा में मनाया महिला किसान दिवस

-महिला किसानों को आधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक खेती और मूल्य संवर्धन से आय बढ़ाने के दिए सुझाव; पोषण वाटिका व सरकारी योजनाओं के प्रति किया जागरूक

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिवकुमार यादव । कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा की ओर से 15 अक्टूबर 2026 को केंद्र परिसर में महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली देहात के विभिन्न गांवों से आईं महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को सम्मान देना तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, पोषण, प्राकृतिक खेती और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी. के. राणा ने अतिथियों का स्वागत किया और केंद्र की ओर से संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र दिल्ली के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक खेती, वैज्ञानिक तकनीकों और क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

महिला सशक्तिकरण से मजबूत होगा ग्रामीण भारत

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती रेखा रानी ने महिला किसानों को महिला किसान दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। आज महिलाएं नई तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा, “आज की महिला सिर्फ घर और चूल्हे तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत की जुताई से लेकर फसलों के प्रबंधन और विपणन तक हर मोर्चे पर नेतृत्व कर रही है। महिला किसानों का सशक्तिकरण ही ग्रामीण भारत और विकसित भारत की असली नींव है।”

रेखा रानी ने महिला किसानों से केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कृषि के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसरों को भी अपनाना चाहिए, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

प्राकृतिक खेती और मूल्य संवर्धन पर जोर

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरपाल सिंह डागर ने कहा कि भविष्य में गो-आधारित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने और बेहतर विपणन रणनीतियां अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान अपने उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय उनसे प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर बाजार में उतारें, तो उनकी आमदनी बढ़ सकती है। अचार, मुरब्बा और अन्य खाद्य उत्पाद बनाकर किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

पोषण वाटिका से परिवार को मिलेगा पौष्टिक आहार

केंद्र की गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. ऋतु सिंह ने महिला किसानों को शुभकामनाएं देते हुए परिवार के पोषण और स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “एक महिला किसान न केवल देश के अन्न भंडार को भरती है, बल्कि वह अपने पूरे परिवार के स्वास्थ्य और पोषण की रीढ़ भी होती है। खेती के साथ-साथ महिलाओं को अपने और अपने बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”

उन्होंने महिलाओं को घर के आसपास उपलब्ध खाली जगह में पोषण वाटिका विकसित करने की सलाह दी, ताकि परिवार को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां और फल मिल सकें। उन्होंने बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों को दैनिक आहार में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही, कृषि उत्पादों से अचार, मुरब्बा, चिप्स और बेकरी उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीके भी बताए।

कम भूमि में बागवानी से बढ़ सकती है किसानों की आय

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि दिल्ली जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सीमित कृषि भूमि को देखते हुए पारंपरिक खेती के साथ बागवानी अपनाना समय की मांग है। महिला किसान छोटे खेतों और घरेलू स्तर पर उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें उगाकर अपनी आय बढ़ा सकती हैं। उन्होंने किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सरकारी योजनाओं और पर्यावरण अनुकूल खेती की जानकारी

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित दिल्ली सरकार के प्रसार अधिकारी मुकेश शर्मा ने किसानों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से संचालित आत्मा (ATMA) योजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं और लाभों के बारे में बताया।

उन्होंने रासायनिक खादों के संभावित दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही, प्राकृतिक खेती को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए किसानों से टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. समरपाल सिंह, श्री कैलाश, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. बाबूलाल फागोड़िया एवं बृजेश यादव ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में दिल्ली देहात के विभिन्न गांवों से आए किसानों ने भाग लिया और कृषि, पोषण, बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी. के. राणा ने महिला किसानों की भागीदारी और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। आयोजन के माध्यम से महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

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