द्वारका/दिल्ली/शिव कुमार यादव/- द्वारका जिले की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड टीम ने कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जत्थेड़ी और ओम प्रकाश झारोदा गिरोह के एक शार्प शूटर मोहित उर्फ शूटर को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता प्राप्त की है। आरोपी मोहित के पास से 01 देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए। मोहित का नाम पहले भी हरियाणा के गांव डाबौदा में सरपंच सतबीर की हत्या के मामले में सामने आ चुका है।
आपराधिक इतिहास और गिरफ्तारीः
इस संबंध में द्वारका डीसीपी अंकित सिंह ने बताया कि मोहित उर्फ शूटर का नाम कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जत्थेड़ी और ओम प्रकाश झारोदा के गिरोह से जुड़ा हुआ है। पुलिस को सूचना मिली थी कि मोहित किसी गड़बड़ योजना को अंजाम देने के लिए ककरौला में किसी से मिलने जा रहा है। एटीएस की टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया और उसके पास से एक लोडेड पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए।
पूछताछ में मोहित ने स्वीकार किया कि वह 2019 में हरियाणा के गांव डाबौदा के सरपंच सतबीर की चर्चित हत्या में शामिल था। उसने यह भी बताया कि इस हत्या को काला जत्थेड़ी और राजू बसोदी के निर्देशों पर अंजाम दिया गया था।
ओम प्रकाश झारोदा गिरोह का कनेक्शनः
मोहित ने खुलासा किया कि हाल ही में उसकी मुलाकात ओम प्रकाश झारोदा से एक कोर्ट परिसर में हुई थी। ओम प्रकाश ने उसे स्थानीय व्यापारियों को धमकी देने और उनसे पैसे उगाही करने के लिए आग्नेयास्त्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मोहित ने इस योजना को संदीप उर्फ काला जत्थेड़ी और ओम प्रकाश झारोदा के मार्गदर्शन में अंजाम देने का इरादा किया था।
कार्रवाई और टीम की भूमिकाः
इस सफलता के पीछे द्वारका जिले की एटीएस टीम की मेहनत और समर्पण है। टीम ने नियमित रूप से गिरोह से जुड़े अपराधियों पर निगरानी रखी और स्थानीय मुखबिरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मोहित की गिरफ्तारी के लिए योजना बनाई।
डीसीपी द्वारका श्री अंकित सिंह के निर्देशन में, एटीएस टीम ने ककरौला गांव के चन्द्रशेखर आजाद पार्क के पास जाल बिछाया और लंबे इंतजार के बाद मोहित को गिरफ्तार किया। टीम में शामिल इंस्पेक्टर कमलेश कुमार, एएसआई जितेंद्र, एएसआई विजय सिंह, एचसी सोनू, एचसी मनीष और एचसी जगत सिंह की सक्रिय भूमिका रही।
“नो गन्स, नो गैंग्स“ ऑपरेशनः
आईपीएस श्री अंकित सिंह के नेतृत्व में “नो गन्स, नो गैंग्स“ ऑपरेशन को हरी झंडी दी गई थी, जिसका उद्देश्य गिरोहों की रीढ़ तोड़ना और अवैध हथियारों का उपयोग रोकना था। इस ऑपरेशन के तहत, द्वारका जिले की पुलिस ने गिरोहों और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और अवैध हथियारों के साथ अपराध करने वालों को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए।


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