किरायेदार और मकान मालिक..दोनों ही ये ज़रूरी ख़बर पढ़ लीजिए

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किरायेदार और मकान मालिक..दोनों ही ये ज़रूरी ख़बर पढ़ लीजिए

मानसी शर्मा / – अगर आप भी किराये का मकान लेकर रहते हैं या अपना मकान किराये पर दिए हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लीजिए। किरायेदार और मकान मालिक (Landlord) के बीच अक्सर ही रेंट या किसी और बात को लेकर विवाद होता ही रहता है। इन विवादों के समाधान के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने 2021 में नया किराये कानून लाई थी। इसमें मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार को तय कर दिया गया है। लेकिन अभी भी बहुत से लोग इस कानून के बारे में ठीक से नहीं जानते हैं।

केंद्र सरकार (Central Government) के Model Tenacny Act यानी मॉडल किरायेदारी अधिनियम में कई प्रावधान हैं, जो किरायेदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा करने के लिए बनाए गए हैं। इस कानून के तहत राज्य सरकारों को नए नियम लागू करने की अनुमति भी है। आइये विस्तार से जानते हैं इस कानून के तहत मकान मालिक और किरायेदार को क्या-क्या अधिकार मिले हैं।

सबसे पहले जानिए क्या है Model Tenacny Act?
मॉडल किरायेदारी अधिनियम (Model Tenancy Act), 2021 घर-दुकान या किसी परिसर के किराये को विनियमित करने और मकान मालिकों और किरायेदारों के हितों की रक्षा के लिए लाया गया था। इस कानून के जरिए सरकार देश में एक समान रेंटल मार्केट बनाने का मकसद रखती है। इस कानून के तहत संपत्ति मालिक और किरायेदार के बीच एक लिखित समझौता जिसे हम रेंट एग्रीमेंट कहते हैं, होना अनिवार्य है। रेंट एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में एक स्वतंत्र प्राधिकरण और यहां तक कि किरायेदारी से संबंधित विवादों को लेने के लिए एक अलग कोर्ट की भी स्थापना की गई है।

नहीं तोड़ सकते हैं ये नियम
किसी भी संपत्ति को किराये पर लेने से पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना जरूरी होता है, लेकिन किरायेदारी कानून में इसके कुछ बनाए हैं। आवासीय परिसर के लिए किरायेदार को सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) के तौर पर अधिकतम 2 महीने का किराया और गैर-आवासीय परिसर के लिए अधिकतम 6 महीने तक का किराया देने की बात कही है। याद रखें मकान मालिक इससे ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकते हैं।

किरायेदार के मकान छोड़ने के 1 महीने के अंदर मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस देना होता है। वहीं, मकान मालिक द्वारा किराया बढ़ाने के लिए कम से कम 3 महीने पहले किरायेदार को बताना होता है। किराये की प्रॉपर्टी की देखरेख मकान मालिक और किरायेदार, दोनों को ही करनी होती है। घर की पुताई और रंगरोगन आदि की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी, तो वहीं पानी के कनेक्शन को ठीक करवाना और बिजली कनेक्शन की मरम्मत आदि की जिम्‍मेदारी किरायेदार के हिस्से में आती है।

इस कानून के मुताबिक, मकान मालिक जब चाहे तब किरायेदार के घर नहीं आ जा सकता। मकान मालिक को आने से पहले से 24 घंटे पहले किरायेदार को जानकारी देना होता है। वहीं, किसी भी प्रकार का विवाद होने पर मकान मालिक किरायेदार को बिजली-पानी की सप्लाई नहीं बंद कर सकते।
यदि किसी मकान मालिक ने रेंट एग्रीमेंट में बताई गई सभी शर्तों को पूरा कर लिया है। इसके बाद भी किरायेदार, अवधि समाप्त होने पर घर खाली नहीं करता है तो मकान मालिक मासिक किराए को दोगुना करने का हकदार है और 2 महीने और उसे 4 गुना तक भी कर सकता है।

जानिए क्या है रेंट एग्रीमेंट
जब भी कभी आप किराए का घर लेने जाएं तो सबसे पहले मकान मालिक आपको रेंट एग्रीमेंट कराने के लिए बोलता है और बिना रेंट एग्रीमेंट के अपना घर किराए पर नहीं देता। रेंट एग्रीमेंट एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसका मतलब यह है कि आप उस घर में किराएदार के हैसियत से रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि रेंट एग्रीमेंट हमेशा 11 महीने के लिए ही क्यों होता है और इसका क्या कारण है?

किस वजह से बनता है 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट?
पूरे देश भर में रेंट एग्रीमेंट के लिए कानून में बकायदा नियम बने हैं। भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 (डी) के तहत रेंट एग्रीमेंट करवाया आवश्यक होता है। लेकिन यह एग्रीमेंट कम से कम एक साल के लिए बनवाना होता है और एक साल से कम अवधि के लिए रेंट एग्रीमेंट या लीज एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक नहीं होता है। सरल भाषा में कहें तो आपका मकान मालिक 11 महीने का ही रेंट एग्रीमेंट बनवा सकता है।

कानून के जानकारों का मानना है कि देश में कानून पेचीदा हैं और ज्यादातर कानून किराएदार के पक्ष में बने हैं। देखा गया है कि किराएदार का अकसर मकान मालिक से विवाद हो जाता है और उसके बाद जब मकान मालिक अपना घर खाली करवाना चाहता है तो कानूनी प्रक्रियाओं में सालों तक फंस जाता है। इसलिए 11 महीने का ही रेंट एग्रीमेंट बनवाया जाता है।

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