कांवड़ यात्रा में मातृभक्ति की मिसाल: मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक चल रहे हैं दो भाई

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August 24, 2026

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कांवड़ यात्रा में मातृभक्ति की मिसाल: मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक चल रहे हैं दो भाई

-श्रद्धा, सेवा और पारिवारिक संस्कारों का अनुपम संगम

हरिद्वार/अनीशा चौहान/-  सावन का पवित्र महीना आरंभ होते ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति की गूंज सुनाई देने लगती है। इसी के साथ कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत होती है, जिसे आस्था, तप और समर्पण का पर्व माना जाता है। इस बार की यात्रा में दिल्ली के नजफगढ़ निवासी दो भाइयों आकाश ठाकुर और सुमित ठाकुर की अनूठी भक्ति और मातृसेवा की कहानी सबका दिल छू रही है।

इन दोनों भाइयों ने अपनी मां किरण देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की कठिन यात्रा का संकल्प लिया है। हर दिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलते हुए, ये दोनों भाई गंगाजल लेकर मां को कंधे पर बिठाकर आगे बढ़ते हैं। यह पूरी यात्रा लगभग 200 किलोमीटर लंबी है, जिसे वे पूर्ण श्रद्धा और उत्साह से तय कर रहे हैं।

पिता से मिली सेवा और भक्ति की प्रेरणा
आकाश और सुमित की यह भावना उनके पिता से प्रेरित है, जिन्होंने कई बार अपनी मां  यानी इन भाइयों की दादी  को कांवड़ में बैठाकर यह यात्रा पूरी की थी। उसी परंपरा और श्रद्धा को आगे बढ़ाते हुए दोनों भाइयों ने भी मां की सेवा को धर्म मानते हुए यह यात्रा करने का निर्णय लिया। आकाश ठाकुर बताते हैं कि वे साल 2012 से कांवड़ यात्रा में भाग ले रहे हैं। उनका कहना है,
“हम अपने पिता के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। यह हमारी दूसरी यात्रा है, जिसमें हम मां को कांवड़ में बैठाकर ला रहे हैं।”

भक्ति और मातृसेवा का दुर्लभ संगम
यह यात्रा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि माता के प्रति प्रेम, समर्पण और सम्मान की एक प्रेरणादायक मिसाल भी है। आकाश और सुमित कहते हैं कि उनका उद्देश्य केवल भगवान शिव की कृपा पाना नहीं है, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

आकाश ठाकुर का कहना है,
“हम चाहते हैं कि लोग अपने माता-पिता का सम्मान करें और उनकी सेवा करें। यह हमारा कर्तव्य है।” कांवड़ यात्रा में आकाश और सुमित की यह पहल न केवल भक्ति की भावना को दर्शाती है, बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था और जीवन मूल्यों का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता और सेवा का भाव रखते हैं।

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