ओवैसी ने पाकिस्तान को ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार देने की सिफारिश करने पर लगाई लताड़ बोले- क्या इसीलिए की थी सिफारिश?’

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ओवैसी ने पाकिस्तान को ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार देने की सिफारिश करने पर लगाई लताड़ बोले- क्या इसीलिए की थी सिफारिश?’

हैदराबाद/शिव कुमार यादव/- अमेरिका ने बीती रात ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। यह कदम अमेरिका द्वारा गुआम में कई बी-2 स्टील्थ बॉम्बर जेट भेजने के बाद उठाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु स्थलों पर हमलों का एलान किया और ईरान को शांति की राह पर लौटने की हिदायत दी। लेकिन एआईएमएआई चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हमले की निंदा करते हुए पाकिस्तान को लताड़ लगाई और कहा कि क्या पाकिस्तान ने इस सब के लिए डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार देने की सिफारिश की थी।

उन्होंने इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका की एंट्री पर कहा कि क्या इसीलिए पकिस्तान ने ट्रंप को शांति पुरस्कार देने की सिफारिश की थी। क्या इसीलिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लंच किया था? आज वे सभी बेनकाब हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन
ईरान पर अमेरिकी हमलों पर एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, ’यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। ऐसा करके मुझे यकीन है कि आने वाले पांच साल में ईरान एक परमाणु राज्य बन जाएगा। हमले से पहले ईरान ने अपने भंडार को स्थानांतरित कर दिया होगा। यह एक निवारक नहीं होगा। अब कई अरब देश सोचेंगे कि उन्हें परमाणु क्षमता की जरूरत है।’

परमाणु हथियार होने के बारे में सिर्फ अफवाह फैलाई गई
उन्होंने कहा कि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि 16 मिलियन से अधिक भारतीय खाड़ी और मध्य पूर्व में रहते हैं। अगर उस क्षेत्र में युद्ध छिड़ जाता है, जो दुर्भाग्य से बहुत संभव है, तो इसका वहां रहने वाले भारतीयों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। भारतीय कंपनियों ने इन सभी अरब देशों या खाड़ी देशों में जो निवेश किया है और विदेशी निवेश का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ईरान के पास परमाणु हथियार होने के बारे में सिर्फ अफवाह फैलाई गई। इराक में भी यही किया गया था, सामूहिक विनाश के हथियार वगैरह वगैरह। कुछ भी नहीं निकला।

’हमारी सरकार अमेरिका की इस एकतरफा बमबारी की निंदा करेगी’
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अमेरिका की ओर से किए गए इस हमले से नेतन्याहू को मदद मिली है, जो फलस्तीनियों का कत्लेआम करने वाला है। गाजा में नरसंहार हो रहा है और अमेरिका को इसकी कोई चिंता नहीं है। अमेरिका की नीति केवल इस्राइली सरकार के अपराधों को छिपाने की है। गाजा में जो हो रहा है, वह नरसंहार है और कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है। कोई यह क्यों नहीं पूछ रहा है कि इस्राइल के पास कितने परमाणु भंडार हैं? ईरान में इन तीन या चार जगहों पर अमेरिकी बमबारी करने से वे नहीं रुकेंगे। मेरे शब्दों पर ध्यान दें, ईरान भी अगले 5 से 10 वर्षों में ऐसा करेगा, दूसरे देश भी ऐसा करेंगे क्योंकि अब उन्हें एहसास हो गया है कि परमाणु बम और परमाणु हथियार होना ही इस्राइल के वर्चस्व के खिलाफ एकमात्र निवारक है। मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकार अमेरिका की इस एकतरफा बमबारी की निंदा करेगी, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। मुझे उम्मीद है कि सरकार ईरान के परमाणु संयंत्रों पर बमबारी की निंदा करेगी, जो आज हुई है।

पहले जानिए अमेरिका ने बीती रात क्या किया?
इससे पहले ईरान के परमाणु ठिकानों पर इस्राइल ने हमले किए थे, लेकिन ईरान के परमाणु ठिकाने भूमिगत हैं, जिससे इस्राइली हमलों में उन्हें खास नुकसान नहीं हुआ। इस्राइल के पास ऐसे हथियार नहीं हैं, जो भूमिगत ढांचे को तबाह कर सकें। इस बीच अमेरिका की एंट्री हुई और अमेरिका ने अपने सबसे खास हथियारों में से एक बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से 30,000 पाउंड के मैसिव ओर्डिनेंस पेनिट्रेटर या बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया, जो जमीन के भीतर भी भारी तबाही मचाने की ताकत रखते हैं। इस दौरान अमेरिका ने तीन प्रमुख ईरानी परमाणु ठिकानों फोर्डो, नतांज और इस्फाहान को निशाना बनाया।

ओवैसी के निशाने पर पाकिस्तान क्यों आया?
दरअसल, पाकिस्तान 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम की सिफारिश करने वाला है। उसका कहना है कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ट्रंप के कूटनीतिक दखल और मध्यस्थता ने बड़े युद्ध को टालने में मदद की। यह आधिकारिक एलान ट्रंप के व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मेजबानी के तीन दिन बाद किया गया।

नोबेल के लिए नामित करने के वादे पर ही मुनीर को आमंत्रित किया गया था
गौरतलब है कि पाकिस्तान की ओर से नोबेल के लिए ट्रंप को नामित करने के वादे पर ही मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया था। ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया। हालांकि, भारत उनके दावे को सिरे से खारिज कर चुका है। यह भी साफ करता रहा है कि भारतीय सेना के भीषण जवाबी हमले के कारण पाकिस्तान को संघर्ष रोकने के लिए गुहार लगानी पड़ी।

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