एक बार फिर असम में बाढ़ ने मचाई तबाही, अब तक 52 लोगों की मौत

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October 22, 2026

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एक बार फिर असम में बाढ़ ने मचाई तबाही, अब तक 52 लोगों की मौत

-225 सड़कें, 10 पुल हुए तबाह -24 लाख से ज्यादा लोग हुए प्रभावित -ASDMA के अनुसार बाढ़ के कारण 63,490.97 हेक्टर फसल भूमि हुई जलग्रस्त

असम/नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- मानसून की बारिश अभी शुरू ही हुई है और असम में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। यहां की ज्यादातर नदियां उफान पर हैं और कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से असम के 30 जिलों के 24 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 52 लोगों की मौत हो चुकी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ के कारण 63,490.97 हेक्टेयर फसल भूमि भी जलमग्न हो गई है।

अधिकारियों ने कहा कि शनिवार को भूस्खलन के कारण दो और लोगों की मौत की सूचना मिली है। इसके बाद बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 52 हो गई है। वहीं, काजीरंगा नेशनल पार्क का करीब 70 फीसदी हिस्सा पानी में डूब गया है, जिसके कारण तीन गैंडे और 62 हॉग हिरण समेत 77 से ज्यादा जानवर मारे गए हैं।

हजारों लोगों ने राहत शिविरों में ली शरण

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 30 जिलों में कुल 24,20,722 लोग प्रभावित हुए हैं। धुबरी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक है. यहां 7,75,721 लोग प्रभावित हैं। इसके बाद दरांग में 1,86,108, कछार में 1,75,231, बारपेटा में 1,39,399 और मोरीगांव में 1,46,045 लोग प्रभावित हैं। अधिकारियों ने कहा कि 47,103 लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में कुल 15,28,226 जानवर प्रभावित हैं। इसमें 94 जानवरों को बचाया जा चुका है, जबकि 11 की इलाज के दौरान मौत हो गई है और 50 अन्य को वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।

225 सड़कें, 10 पुल हो गये नष्ट

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, असम में बाढ़ के कारण 225 सड़कें और 10 पुल पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को डिब्रूगढ़ जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि डिब्रूगढ़ शहर में जलभराव की समस्या का समाधान खोजने के लिए हम विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों की मदद लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि नालों में रुकावट के कारण डिब्रूगढ़ में जलभराव है और ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे जल निकासी में दिक्कतें आ रही हैं।

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