नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- उजवा, 17 फरवरी 2026, राजधानी दिल्ली के उजवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में ग्रीष्म ऋतु की फसलों की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार की एटीएमए योजना के तहत संपन्न हुआ, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के अध्यक्ष डॉ. डी.के. राणा ने किया। उन्होंने किसानों का स्वागत करते हुए गर्मियों की फसलों में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम) की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर बीज उपचार और वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण अपनाने से लागत घटाने के साथ-साथ बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

सरकारी योजनाओं और जैविक खेती पर मार्गदर्शन
कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को दिल्ली सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरे और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो।

उच्च मूल्य सब्जियों की खेती पर विशेष सत्र
बागवानी विशेषज्ञों ने परि-नगरीय क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों जैसे लौकी, करेला, भिंडी, खीरा और हरी मिर्च की वैज्ञानिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली, पॉलीहाउस संरचना और मल्चिंग तकनीक अपनाकर पानी की बचत करते हुए अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बदलते मौसम और सीमित जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग समय की आवश्यकता है।
प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण और व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान किसानों को केंद्र परिसर में स्थापित प्रदर्शन प्लॉट्स का दौरा कराया गया। यहां उन्हें बीज शोधन, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई के आधुनिक तरीके और कीट-रोग नियंत्रण की व्यावहारिक जानकारी दी गई। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।
आय वृद्धि की संभावनाएं
कार्यशाला के समापन पर अधिकारियों ने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हैं तो ग्रीष्मकालीन फसलों में उत्पादन क्षमता के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि विज्ञान केंद्र भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि किसान नई तकनीकों से जुड़ सकें।


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