27 जून को देश का सबसे बड़ा आध्यात्मिक उत्सव जगन्नाथ रथ यात्रा देश-विदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस्कॉन द्वारका ने शुक्रवार को शाम 4 बजे उन लोगों को यह सुअवसर दिया है जो इस रथ यात्रा में शामिल हो पाएँगे और रथ की रस्सी को अपने हाथों से खींचकर शुभ लाभ प्राप्त करेंगे और भगवान से प्रार्थना करेंगे कि हमें इस भौतिक संसार में जीवन और मुत्यु के चंगुल से बचा लीजिए। जो इसमें सम्मिलित नहीं हो पाएँगे वो इस्कॉन द्वारका के यूट्यूब चैनल के माध्यम से भगवान के दर्शनों का लाभ ले सकेंगे। पुरी के बाद दिल्ली में इस्कॉन द्वारका की यह सबसे बड़ी रथ यात्रा मानी जाती है।
रथ यात्रा के आकर्षण में भगवान जगन्नाथ को इस बार 11000 किलो आमों का भोग अर्पित किया जाएगा और फिर बाद में उसे भक्तों के बीच प्रसाद स्वरूप वितरण किया जाएगा। इन आमों की खासियत यह रहेगी कि 108 प्रकार के आम रथ यात्रा महा-महोत्सव की शोभा को बढ़ाएँगे। रथ यात्रा के साथ-साथ श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश का ऑल्टर भी किस्म-किस्म के आमों से सजा रहेगा।

इस्कॉन द्वारका के रथ यात्रा के संयोजक बताते हैं कि जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। मंदिर से बाहर सड़कों, दुकानों, गली-चौबारों पर खड़े लोग जानना चाहते हैं कि रथ पर आरूढ़ ये जगन्नाथ जी कौन हैं! और उनके साथ दाएँ और बीच में बैठी महारानी कौन हैं! श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी कृत चैतन्य चरितामृत में उल्लेख किया गया है कि—
जेई जगन्नाथ सेई कृष्ण सेई गौर…
इसमें जो कृष्ण हैं वही जगन्नाथ जी के रूप में दर्शन देते हैं। रोहिनी माता जब कृष्ण की वृंदावन की लीलाओं का वर्णन कर रही थी तो अचानक वहाँ आए कृष्ण- बलराम ने उसको सुनकर जो आश्चर्यपूर्ण भाव स्वरूप प्रकट किया था, वहीं जगन्नाथ जी हैं। और वहीं जगन्नाथ-बलदेव-सुभद्रा को रथ पर आरूढ़ करके उनको जो कोई खींचता है तो रथ यात्रा के महत्व के बारे में शास्त्रों में स्कंद पुराण में वर्णन आता है कि—

रथस्थं वामनं दृष्ट्वा पुनर्जन्मम न विद्यते…
अर्थात अगर हम रथ यात्रा उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ को रथ पर देखते हैं, तो हमें फिर से पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ेगा यानी जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है। एक साधारण कभी मंदिर न जाने वाले व्यक्ति से भी यह आग्रह किया जाता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होकर रथ को अपने हाथों से रथ की रस्सी को खींचने से भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है। जब भगवान की रथ यात्रा निकल रही हो तो लगभग सभी लोगों को चाहिए कि वह तुरंत यात्रा में सम्मिलित होने में संकोच न करें। रथ यात्रा में चलने वालों को भगवान के रथ के पीछे-पीछे चलना चाहिए।
रथ यात्रा उत्सव में भगवान को रथ पर बैठाकर रथ को शहर की सड़कों से होकर ले जाया जाता है जिससे लोग भगवान के दर्शनों का लाभ उठा सकें। आज से लगभग 500 साल पूर्व श्री चैतन्य महाप्रभु (श्रीकृष्ण) ने भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा को उनके रथों पर विराजमान होते देखा तो उनके सामने मनोहारी नृत्य करने लगे। इसी तरह अनेक बरसों से यह यात्रा परंपरागत रूप से चली आ रही है। इस बार यह रथ यात्रा सेक्टर 13 इस्कॉन मंदिर के पीछे की ओर से चलकर एमआरवी स्कूल तक जाएगी। फिर वहाँ से दाईं ओर मुड़ते हुए लाल बत्ती क्रॉसिंग से बाएँ लेते हुए डीपीएस पुरी चौक से सीधे सेक्टर 2 और 6 की लाल बत्ती से दाएँ मुड़ते हुए गुरुद्वारा साहिब चौक तक जाएगी। फिर दाएँ मुड़ते हुए डीएवी स्कूल से होते हुए ट्रयू फ्रेंड्स अपार्टमेंट, कामाक्षी अपार्टमेंट से दाएँ मुड़ते हुए द्वारका मार्केट सेक्टर 6 और 10 की लाल बत्ती को क्रॉस करते हुए सीधे आशीर्वाद चौक तक जाएगी और फिर वहाँ से बाएँ मुड़ते हुए के एम चौक तक जाएगी और फिर वहाँ से अंत में दाएँ मुड़ते हुए सेक्टर 13 इस्कॉन मंदिर पहुँचेगी। द्वारका की जिन-जिन सड़कों, बाजारों में से रथ यात्रा निकलेगी वहाँ की 50 से अधिक विभिन्न सोसाइटीज रथ पर आरूढ़ भगवान का स्वागत करेंगी। उनके दर्शन और आरती करेंगी और उनके द्वारा जगह-जगह भक्तों के लिए जलपान की व्यवस्था भी रहेगी।
रथ यात्रा से पूर्व शाम 4 बजे भगवान को 1008 भोग अर्पित किए जाएँगे क्योंकि बहुत दिनों तक भगवान जगन्नाथ फलों को रस औषधियों का पान करने के बाद जब ठीक होकर वापस आते हैं तो उन्हें तरह-तरह के पसंदीदा व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए मंदिर प्रांगण में एक विशेष आनंद बाजार उत्सव सजाया जाएगा जिसमें अनेक उड़िया व्यंजन जैसे– खाखरा पीठा, मंडा पीठा, खाजा, मालपुआ, डालमां, राइस, छेना पोड़ा, टानखा, तुर्रानी आदि शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त गीत-संगीत, नृत्य-संकीर्तन और आकर्षक व्यंजनों से सजे इस रथ यात्रा उत्सव में सभी भक्त अधिक से अधिक संख्या में भाग लेंगे और भगवान के रथ का दर्शन करेंगे और उनकी कृपा प्राप्त करेंगे। अंत में सभी भक्तजन भगवान का प्रसाद ग्रहण करेंगे।”


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