अनीशा चौहान/- साल की सबसे बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी को व्रत रखने का जितना महत्व है उतना ही महत्व दान आदि किए जाने वाले विशेष पुण्य कार्यों का भी है। खासतौर से शास्त्रों में जल दान और वैष्णवों की सेवा का भी महत्व बताया गया है। इस्कॉन द्वारका में 7 जून को हज़ारों भक्तों ने निर्जला एकादशी व्रत किया और द्वादशी यानी 8 जून को प्रातः 5.30 बजे व्रत का पारण किया।


इस्कॉन द्वारका ने मंदिर परिसर में भक्तों के लिए ताज़ा जूस वितरण सेवा का आयोजन किया। इससे भक्तों को आध्यात्मिक रूप से और पौष्टिक तरीके से अपना उपवास तोड़ने में मदद मिली। प्रसाद स्वरूप बेल का जूस, स्ट्रॉबेरी का जूस, गुलाब जल का जूस, नींबू का पानी, लीची का जूस, पनक्कम, खरबूजे का जूस, सामान्य पानी वितरित किया गया। सैकड़ों भक्तों ने इस दिन महादान के माध्यम से इस पवित्र सेवा को प्रायोजित किया और इस दिव्य सेवा का हिस्सा बने। उन्होंने आध्यात्मिक रूप से इस शक्तिशाली दिन पर भगवान कृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त किया।


7 जून को प्रातः 4.30 बजे से ही भक्त मंगला आरती में सम्मिलित हुए और दर्शन आरती से लेकर दिन भर हरिनाम संकीर्तन कर निर्जल व्रत कर वैष्णव पंरपरा का पालन किया और अपने गुरु एवं भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास किया।


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