इस्कॉन द्वारका में गोवर्धन पूजा की धूमधाम, प्रेम और भक्ति के रंगों से सजा गोवर्धन पूजा उत्सव

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October 26, 2026

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इस्कॉन द्वारका में गोवर्धन पूजा की धूमधाम, प्रेम और भक्ति के रंगों से सजा गोवर्धन पूजा उत्सव

-भक्तों ने किए गोवर्धन रूप में सजे कृष्ण के दर्शन, चावल और हलवे से बना विशाल गोवर्धन पर्वत

द्वारका/नई दिल्ली/- कार्तिक मास में सबका मंगल करने वाली शुभ दीपावली अपनी जगमग के साथ ढेरों खुशियाँ लेकर आई और सबने बढ़-चढ़ उसका स्वागत किया। आशाओं के दीप जलाएँ और निराशा के अंधकार को अपने जीवन से दूर करने का निश्चय किया। उत्सवों की इसी श्रृंखला में बुधवार को इस्कॉन द्वारका में गोवर्धन पूजा उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया गया। मंदिर की सजावट जहाँ भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी, वही गोवर्धन रूप में सजे कृष्ण के विराट रूप ने भक्तों के हृदय में ऊर्जा का संचार किया। इस रूप में दर्शन कर भक्तों ने कृष्ण प्रेम प्राप्त किया।


             गोवर्धन लीला का विशेष महत्व बताते हुए इस्कॉन द्वारका मंदिर के प्रमुख प्रबंधक अर्चित दास प्रभु ने कहा कि, “कृष्णभावनामृत आंदोलन में गोवर्धन-पूजा की बहुत मान्यता है। जैसे कृष्ण पूजनीय हैं, वैसे ही उनकी भूमि वृंदावन और गोवर्धन पर्वत भी पूजनीय हैं। श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि गोवर्धन की पूजा उनकी पूजा के समान है। तब से यह पूजा की जाती है, जो अन्नकूट के नाम से विख्यात है। इस दिन सभी भक्तों को मंदिर में आकर भगवान कृष्ण को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहिए कि खतरों के साए से परे हम इस साल के सारे उत्सव उनकी छत्रछाया में सबके साथ मना पाएँ। और साल भर इसी तरह हम भी स्वयं को सुरक्षित महसूस करें, जैसे हज़ारों वर्षों पूर्व ब्रजवासियों ने कृष्ण के समक्ष अपने आप को सौंप दिया था। उनका विश्वास था कि फसलों की सिंचाई के लिए इंद्र देवता अगर रुष्ट भी हो जाएँ और वर्षा का जल देने से इनकार कर दें तो उनके ऊपर बैठे सर्वोत्तम भगवान कृष्ण सब मंगल कर देंगे और उन्होंने ऐसा किया भी।


              ब्रज के लोगों ने इंद्र की पूजा न करके गोवर्धन पर्वत की पूजा की। चावल, दाल, हलवा, पकौड़ी तथा दूध के व्यंजनदृ खीर, रबड़ी, रसगुल्ला, संदेश व लड्डू बना कर भगवान को अर्पित किए। गायों को सजाकर उन्हें उत्तम चारा दिया और उनकी परिक्रमा कर भगवान को तुष्ट किया।”
उन्होंने आगे बताया कि अतः समय बीतने के लंबे अंतराल के बाद भी कुछ चीजें हमारे जीवन से ज्यों की त्यों जुड़ी रहती हैं। जैसे कृष्ण भगवान ने इंद्र के प्रकोप से ब्रज के लोगों को बचाया, उसी तरह श्रीकृष्ण अपने भक्तों को संरक्षण प्रदान करते हैं। मानव समाज की प्रगति के लिए हमें हमेशा ऐसी सुरक्षा की आवश्यकता है।
             कृष्ण प्रेमी भक्तों ने प्रातः लगभग 8 बजे मंदिर में गोवर्धन कथा का श्रवण किया। साढ़े 9 बजे गोमाता पूजा में भाग लिया। 11 बजे गोवर्धन शिला अभिषेक और साढ़े 11 बजे भगवान को भोग अर्पण किया गया। सभी ने अपने सामर्थ्यानुसार फल, मिठाई और दूध का भोग अर्पण करने में भाग लिया। 12 बजे महाआरती के पश्चात सभी ने अन्नकूट प्रसाद ग्रहण किया और भगवान से प्रार्थना की कि साल भर उनका अन्न भंडार विशाल पर्वत की तरह भरा रहे ताकि वह सामाजिक योगदान में भी अपनी भागीदारी दर्ज करा सकें।  

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