आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की अक्ल आई ठिकाने, भारत से वार्ता के लिए हुआ तैयार

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आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की अक्ल आई ठिकाने, भारत से वार्ता के लिए हुआ तैयार

-शहबाज बोले- भारत से तीन युद्ध ने हमें गरीबी ही दी, हम वार्ता को तैयार

इस्लामाबाद/- आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को एक बार फिर भारत की याद आई है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत के साथ वार्ता करने की मंशा जाहिर की है। शहबाज ने कहा है कि वे सभी गंभीर और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए भारत के साथ वार्ता करना चाहते हैं। भारत के साथ युद्ध का कोई विकल्प नहीं है। साथ ही शहबाज ने यह भी स्वीकारा है कि उनका मुल्क गरीबी और बेरोजगारी से लड़ रहा है। गौरतलब है कि बीते सात महीनों में यह दूसरी बार है जब पाकिस्तान के पीएम शहबाज ने भारत के साथ वार्ता के लिए पेशकश की है।  
                 हमेशा भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले और हर जगह कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान की अब अक्ल ठिकाने आ गई है। पाकिस्तान जानता है कि भारत से अकड़ दिखाने का नतीजा क्या होगा। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब ये मान चुके हैं कि भारत से लड़ाई करने का नुकसान उनके ही देश को भुगतना पड़ेगा। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहबाज ने कहा कि भारत से तीन युद्ध लड़ने के बाद पाकिस्तान को गरीबी ही मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत तैयार है तो हम बातचीत कर सुलह के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।

पाकिस्तान वार्ता को तैयार
शरीफ ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान खनिज शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होने मंगलवार (1 अगस्त) को कहा कि अगर “पड़ोसी“ भी ऐसा करता है तो इस्लामाबाद “गंभीर मामलों“ पर बात करने और चर्चा करने को तैयार है। भारत के स्पष्ट संदर्भ में, शरीफ ने यह भी कहा कि “युद्ध अब कोई विकल्प नहीं है“। ’डस्ट टू डेवलपमेंट’ के नारे के तहत आयोजित इस बैठक का उद्देश्य नकदी संकट से जूझ रहे देश में विदेशी निवेश लाना था।

ढीले पड़े शहबाज के तेवर
शरीफ ने कहा, “हमारे मन में किसी के खिलाफ कुछ नहीं है, हमें अपना खुद का ख्याल रखना है और अपने देश का निर्माण करना है। यहां तक कि अपने पड़ोसी के साथ भी हम बात करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे मामलों पर चर्चा करने में गंभीर हों।“

भारत से युद्ध कर पाकिस्तान को गरीबी मिली
उन्होंने कहा, “युद्ध अब कोई विकल्प नहीं है. पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है – (ये क्षमताएं) हमलावर के रूप में नहीं बल्कि रक्षा उद्देश्यों के लिए हैं।“ शरीफ ने आगे कहा, ’हमने (भारत और पाकिस्तान) पिछले 75 वर्षों में तीन युद्ध लड़े हैं, जिससे अधिक गरीबी, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी पैदा हुई है।’

युद्ध कोई विकल्प नहीं, परमाणु अस्त्रों का भी किया जिक्र
इस दौरान शहबाज नें परमाणु अस्त्रों का भी जिक्र किया। शहबाज नें कहा कि पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश है। हमारी परमाणु क्षमता रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए है न कि आक्रामकता के लिए। लेकिन भविष्य में कभी परमाणु युद्ध हुआ तो यह बताने के लिए कि क्या हुआ था कोई जीवित भी रहेगा या नहीं पता नहीं। इसलिए युद्ध कोई विकल्प नहीं है। शरीफ ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान परमाणु संघर्ष के काले पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है लेकिन भारत को भी इसका एहसास होना चाहिए। यह कोई विकल्प नहीं है।“ उन्होंने कहा, “लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि हमारा पड़ोसी यह समझे कि जब तक असमानताओं को दूर नहीं किया जाता और गंभीर मुद्दों को शांतिपूर्ण और सार्थक चर्चा के माध्यम से संबोधित नहीं किया जाता, तब तक हम सामान्य नहीं हो सकते।“

भारत के साथ तनावपूर्ण हैं पाकिस्तान के संबंध
बता दें कि सीमा पार आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे सहित कई मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अगस्त 2019 में तब और तनावपूर्ण हो गए थे जब भारत ने जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को बदल दिया।

जयशंकर पहले ही साफ कर चुके हैं पाकिस्तान से संबंधों पर भारत का रुख
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले ही भारत का रुख साफ कर चुके हैं। उन्होंने कई बार दो टूक जवाब हेते हुए कहा है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद की नीति खत्म नहीं की जाती तब तक भारत के लिए पड़ोसी देश के साथ सामान्य संबंध रखना संभव नहीं है।

इससे पहले जनवरी में पश्चिमी एशिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों में से एक अल-अरेबिया को दिए इंटरव्यू में जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से भारत के साथ रिश्तों को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से तीन युद्धों में पाकिस्तान ने सबक सीखे हैं और वे अब शांति चाहते हैं। उन्होंने चैनल के माध्यम से ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन कश्मीर में जो कुछ भी हो रहा है, वह रुकना चाहिए।

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