आपातकाल की 50वीं बरसी: भाजपा मना रही ‘संविधान हत्या दिवस’, पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया था

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August 24, 2026

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आपातकाल की 50वीं बरसी: भाजपा मना रही ‘संविधान हत्या दिवस’, पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया था

नई दिल्ली/अनिशा चौहान/-  आज से ठीक 50 साल पहले, 25 जून 1975 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की थी, जिससे आम नागरिकों के सभी संवैधानिक अधिकार छिन लिए गए थे। इस ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसले की 50वीं बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

इस अवसर पर देशभर में आपातकाल के दौर की घटनाओं को जनता के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। साथ ही दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे।

पीएम मोदी ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के पचास साल पूरे हो गए हैं। भारत के लोग इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन, भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया और कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया। ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया था!”

आपातकाल विरोधी आंदोलन का किया स्मरण
पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए लिखा जब आपातकाल लगाया गया था, तब मैं आरएसएस का युवा प्रचारक था। आपातकाल विरोधी आंदोलन मेरे लिए सीखने का एक अनुभव था। इसने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को बचाए रखने की अहमियत को फिर से पुष्ट किया। साथ ही, मुझे राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी लोगों से बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने आगे बताया कि ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन ने आपातकाल विरोधी अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में संकलित किया है, जिसकी प्रस्तावना पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने लिखी है। देवेगौड़ा स्वयं आपातकाल विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे हैं।

भारत के इतिहास में आपातकाल (1975-1977) एक ऐसा दौर रहा जब लोकतंत्र पर सवाल उठे, प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी गई और लाखों लोगों को जेल में डाला गया। भाजपा इसे लोकतंत्र पर हमला मानती है और इस दिन को याद रखने और आने वाली पीढ़ियों को जागरूक करने के रूप में देख रही है।

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