आत्मनिर्भर बनने के लिए मधुमक्खी पालन उत्तम साधन- डॉ. पांडेय

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आत्मनिर्भर बनने के लिए मधुमक्खी पालन उत्तम साधन- डॉ. पांडेय

-कृषि विज्ञान केंद्र उजवा ने बागवानी इकाई के तहत किया दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

 नजफगढ़/नई दिल्ली/- कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली एवं बागवानी इकाई, पर्यावरण विभाग, दिल्ली के द्वारा ’’मधुमक्खी पालन – आत्मनिर्भरता का उत्तम साधन’’ पर जिला स्तरीय दो-दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधुमिशन, राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, कृषि
एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की परियोजना के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र, के परिसर में आयोजित की गई। कार्यक्रम मंे मुख्य अतिथि के रुप डॉ. स ुधाकर पांडेय, सहायक महानिदेशक (बागवानी), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली भारत सरकार उपस्थित होकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
            कार्यक्रम के शुरुआत डॉ प्रमोद कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा एवं निदेशक, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान,
नई दिल्ली ने सभी गणमान्य अतिथियों, वैज्ञानिक णों एवं किसान भाई बंधुओं का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक स्वागत किया एवं बागवानी इकाई, पर्यावरण विभाग, दिल्ली के सहयोग से आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय संगोष्ठी के उद्देश्य के बारे में विस्तृत रूप से प्रतिभागियों को जानकारी दी।


           कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. सुधाकर पांडेय ने हमारे देश के राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन की योजनाओं एवं परिदृय एवं मधुमक्खी पालन से फसलों में होने उपज में बढोत्तरी के बारे में
विस्तृत जानकारी से अवगत करवाया। उन्होंने मधुमक्खी पालन की शुरुआत करने वाले उधमी व प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खी से गुणवत्ता युक्त शहद उत्पादन के साथ शहद की प्रोसेसिंग एवं विपणन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियां शहद उत्पादन एवं परागकण में भी सहायक होती हैं। हमें अब मधुमक्खियों को फसल के अच्छे उत्पादन के लिए उनको कीटनाशकों से बचाना चाहिए। डॉ. पांडेय ने बताया कि किसानों को कृषि के विभिन्न अवयवों के साथ मधुमक्खी पालन के भी प्रमुख व्यवसाय बनाना होगा क्योकिं मधुमक्खी पालन करने से विभिन्न फसलों के 20 से 300 प्रतिशत तक पैदावार में बढोत्तरी दर्ज की गई है। डॉ. पांडेय ने बताया कि हमें वर्तमान में अधिक उत्पादन के साथ-साथ पोषण युक्त फसल एवं प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए, क्योकि महिलाओ ंएवं बच्चों को पोषक तत्वों की कमी के कारण विभिन्न बिमारियों का भी सामना करना पड. रहा है। कार्यक्रम के पूर्व डॉ. सुधाकर पांडेय, ने कृषि विज्ञान केन्द्र की विभिन्न गतिविधियों एवं प्रदर्शन इकाईयों का भ्रमण करके दिल्ली देहात में किसान कल्याण कार्यक्रमों के
बारे में विस्तृत चर्चा की। डॉ. पांडेय ने कार्यक्रम के दौरान किसानों से आग्रह किया कि आप केन्द्र की सभी गतिवधियों एक्सका भ्रमण करके आधुनिकों तकनिको से अवगत होकर लाभ उठावें।


            कार्यक्रम कें इसी क्रम में डॉ पी.के. गुप्ता, ने किसानो ंको संबोधित करते हुए बताया कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि प्रणाली के साथ-साथ मधुमक्खी पालन व्यवसाय सबसे कारगर साबित हो रहा है। इसी
को मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार ने मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत 500 करोड रुपए का आवंटन किया है जिसके तहत मधुमक्खी पालन हेतु अनुदान एवं शहद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण व परिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने कहा है कि हमें मधुमक्खी पालकों को मधुक्खी पालन के साथ मधु क्रांन्ति पोर्टल पर पंजीकरण करवाना चाहिए ताकि जब हम मधुमक्खी के बक्संों को एक जगह से दुसरी जगह स्थानान्तरण करें तो कोई परशानी का सामना ना करना पड़े।
           कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के समापन पर डा. डी. के. राणा, विशेषज्ञ (पादप सुरक्षा), कृवि.के., नइै दिल्ली ने सभी उपस्थित गणमान्य अतिथियों का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक अभिनंदन करत हुए
प्रशिक्षिणार्थियों को दो दिवसीय कार्यक्रम की रुपरेखा के बारे संक्षिप्त जानकारी दी। तकनीकी सत्र की शुरुआत (प्रथम दिन) में डा. डी. के. राणा ने मधुमक्खी के जीवन चक्र मधुमक्खी पालन मे काम आने वाले छत्ते और उपकरणों की गुणवत्ता, परागणकों और मधुमक्खी कॉलोनियों का प्रवाह प्रबंधन, सुपर चैंबर और शहद निष्कासन एवं विभिन्न मौसमों में मधुमक्खी कॉलोनी का वैज्ञानिक प्रबंधन
नें विस्तृत जानकारी से अवगत करवाया। श्री मुकेश शर्मा, प्रसार अधिकारी, कृषि विभाग, दिल्ली सरकार मधुमक्खी पालन जैव विविधता एवं सतत विकास, मधुमक्खियों का कीटनाशको ं से बचाव एवं मधुमक्खी पालको की योजना एवं मधुमक्खी पालन से प्राप्त होने वाले विभिन्न उत्पाद जैसंे शहद, मोम, रॉयल जैली आदि के बारे विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई एवं मधुमक्खी पालन के विभिन्न रोग, माइट, कीट एवं शत्रु और उनके प्रबंधन के बारे जानकारी दी। श्री मुकेश ने बताया कि मधुमक्खी पालकों का प्रमुख उद्देश्य मधुमक्खी पालन से अच्छी आय के साथ-साथ उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता युक्त शहद भी उपलब्ध करवाना है। विगत वर्षो से कोरोना महामारी के समय शहद हमारे रोजाना खान-पान का हिस्सा बन गया है।
             डॉ. रितु सिंह, विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) कृ. वि. के., नई दिल्ली ने शहद उत्पादन, उपयोग, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन एवं निर्यात के बारे में किसानों को अवगत करवाया।
           तकनीकी सत्र की शुरूआत (द्वितीय दिन) – कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत उपस्थित वक्ताओं के सम्मान से की गई। डा. डी. के. राणा, ने मधुमक्खी के बक्सों के स्थानान्तरण, जगह का चुनाव, बक्सों के स्थानान्तरण का तरीका, रानी मधुमक्खी की देखभाल एवं सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। श्री मनोज पाठक, तकनीकी सहायक, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, करनाल सेन्टर, हरियाणा ने प्रतिभागियों को मधुमक्खियों के लिए वर्ष भर फलोरा एवं नेक्टर की उपलब्धता के बारें में अवगत करवाया।
श्री निरंकार दत्त विशिष्ट, बागवानी अधिकारी, बागवानी विभाग, दिल्ली ने राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधुमिशन परियोजना के अन्तर्गत दिल्ली मे होने वाले प्र्रशिक्षणों एवं जागरुकता कार्यक्रमों एवं योजनाओं के बारे में अवगत करवाया। श्री देवेन्द्र कुमार, निदशक, खादी ग्राम उधोग, दिल्ली ने भारत सरकार एवं दिल्ली सरकार के द्वारा मधुमक्खी पालन के तहत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन यो जना, राष्ट्रीय हनी मिशन एवं व्यक्तिगत रुप से मिलने वाली अनुदान एवं योजनाओं के बारे में अवगत करवाया। इसके अलावा खादी ग्राम उधोग के तहत डेयरी व्यवसाय एवं अन्य उधम में मिलने वाली अनुदान के बारें में अवगत करवाया। कार्यक्रम के अन्त में श्री राकेश कुमार, विशेषज्ञ (बागवानी) ने मधुमक्खियों के़ द्वारा बागवानी फसलों में परागण प्रबंधन के बारे में बताते हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में उपस्थिती के लिए सभी प्रतिभागियों एवं वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
             इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र के सभी वैज्ञानिकगण डॉ. समर पाल सिंह, श्री कैलाश, डॉ. जय प्रकाश, श्री बृजेश यादव, श्री राम सागर, श्री सुबेदार एवं श्रीमती मंजू, श्री विशाल, श्री आत्माराम एवं श्री
योगेश कुमार त्यागी, श्री यशपाल सिंह, श्री कुलदीप कुमार एवं श्री सन्त कुमार तोमर बागवानी अधिकारी, बागवानी इकाई, पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी कार्यक्रम में 350 से अधिक किसानों एवं महिला किसानों ने भागदारी की।

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