आकाशवाणी मर्यादित भाषा- संस्कृति और संस्कार देती है – वक्ता आरजेएस कार्यक्रम   

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
April 15, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

आकाशवाणी मर्यादित भाषा- संस्कृति और संस्कार देती है – वक्ता आरजेएस कार्यक्रम   

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-  राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के उपलक्ष्य में “बदलते युग में प्रसारण की भूमिका” विषय पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन आरजेएस पीबीएच (परिवार-बेस्ड ह्यूमैनिटी) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जो आरजेएस का 396वां कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम कबीर दिनोदय, देवास (मध्य प्रदेश) के संपादक दयाराम मालवीय द्वारा अपनी नानी स्वर्गीय श्रीमती जमनाबाई मालवीय की स्मृति में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आरजेएस पीबीएच के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” जैसे आदर्श वाक्य से की। उन्होंने कहा कि 23 जुलाई को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय प्रसारण दिवस, भारत में संगठित रेडियो प्रसारण की शुरुआत की स्मृति में मनाया जाता है।

कार्यक्रम के सह-आयोजक दयाराम मालवीय ने आकाशवाणी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे प्रसारणों और किसानों को जागरूक करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अपनी नानी को याद करते हुए भावुक होकर कहा कि उनके संस्कारों ने उन्हें जीवन में सकारात्मक दिशा दी। उन्होंने कबीर गायक दयाराम सारोलिया का भी आभार प्रकट किया, जिनके माध्यम से वे आरजेएस मंच से जुड़े।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रसारण कर्मी डॉ. हरि सिंह पाल ने आकाशवाणी की 23 भाषाओं और 182 बोलियों में होने वाले प्रसारणों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह माध्यम देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधता है और दूरदराज़ के क्षेत्रों तक भी इसकी पहुँच है। मुख्य वक्ता प्रसार भारती के सलाहकार डॉ. आर. के. त्यागी ने बताया कि आज के डिजिटल युग में रेडियो सेट की जगह अब मोबाइल ऐप ने ले ली है, जिससे रेडियो अब विश्वभर में क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

इस अवसर पर रेडियो प्रेमियों, श्रोता संघों तथा विभिन्न राज्यों – जैसे कि केरल, दिल्ली, नागपुर, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और विदेश (सूरीनाम) से जुड़े प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में रेडियो के सकारात्मक प्रभाव और बदलते स्वरूप पर सार्थक संवाद हुआ।

कार्यक्रम के अंत में आरजेएस पीबीएच के 397वें कार्यक्रम की घोषणा की गई, जिसे करगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम की सह-आयोजक टीफा25 सशक्त आरजेसियन स्वीटी पॉल होंगी, जो इसे अपने स्वर्गीय भ्राता डॉ. प्रदीप सक्सेना (लंदन, यूके) की स्मृति को समर्पित करेंगी। कार्यक्रम का समापन सह-आयोजक एवं लोकगायक दयाराम मालवीय द्वारा प्रस्तुत लोकगीत और भजन के साथ हुआ, जिन्होंने आरजेएस पीबीएच के सकारात्मक प्रयासों की भी सराहना की।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox