अजीत डोभाल ने ईरानी एनएसए से की अहम बातचीत

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June 18, 2026

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अजीत डोभाल ने ईरानी एनएसए से की अहम बातचीत

-रक्षा और व्यापार पर फोकस और कई मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ईरान के अपने समकक्ष अली लारीजानी से बातचीत की। दोनों देशों के इन अधिकारियों के बीच भारत और ईरान के बीच व्यापार, रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई। साथ ही चाहबहार पोर्ट को लेकर कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि दोनों अधिकारी जल्द ही द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने को लेकर जल्द ही मिल सकते हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारत की मान्यता
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि ईरान को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का अधिकार है और साथ ही ईरान की कानूनी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप एक विशेष रूप से शांतिपूर्ण ईरानी परमाणु कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी रुचि भी है।

चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट क्या है?
चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है, जिसे भारत और ईरान मिलकर बना रहे हैं। खासकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ यह पोर्ट कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बेहद अहम है। हालांकि अमेरिकी पाबंदियों के कारण चाबहार प्रोजेक्ट पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद, भारत ने इस स्ट्रैटजिक पोर्ट को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए वैकल्पिक रूट के तौर पर मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। यह सहयोग भारत-ईरान संबंधों को गहरा करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में बेहद अहम है।

चाबहार पोर्ट के विकास में भारत की भागीदारी से उसे अफगानिस्तान में एक वैकल्पिक और विश्वसनीय रास्ता मिल जाएगा। इसमें भारतीय मदद से अफगानिस्तान में निर्मित जरंज-डेलाराम सड़क का उपयोग किया जा सकता है, और साथ ही मध्य एशियाई क्षेत्र में एक विश्वसनीय और अधिक सीधा समुद्री मार्ग भी उपलब्ध है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अफगानिस्तान के बीच आने-जाने और व्यापार के लिए सीधे कोई सड़क मार्ग नहीं है।

मई में भी ईरानी NSA से हुई थी बात
बता दें कि इससे पहले मई में भी अजीत डोभाल ने अपने ईरानी समकक्ष के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी। तब दोनों के बीच तत्कालीन क्षेत्रीय स्थिति और चाबहार बंदरगाह परियोजना पर चर्चा हुई थी। उस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पर भी बातचीत हुई थी।

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