अगर जयंत चौधरी एनडीए में आये तो यूपी में बिगड़ जायेगा राज्यसभा चुनाव का गणित

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August 17, 2026

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अगर जयंत चौधरी एनडीए में आये तो यूपी में बिगड़ जायेगा राज्यसभा चुनाव का गणित

-यूपी में 10 सीटों पर किसी की होगी कितनी दावेदारी

लखनऊ/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। जयंत चौधरी के पाला बदलने की खबरों के बीच लोक सभा चुनाव से पहले यूपी में होने वाले राज्यसभा चुनाव पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। इस समय इसके केंद्र में जयंत चौधरी की पार्टी रालोद है। आधिकारिक तौर पर यह पार्टी अभी विपक्षी गठबंधन इं.डि.या. का हिस्सा है। लेकिन, पिछले दो दिनों से रालोद के एनडीए के साथ जाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खास बात यह है कि अब तक जयंत चौधरी या रालोद की ओर से इस चर्चा का कोई खंडन नहीं किया गया है। अगर कयास सही निकले और जयंत ने पाला बदला तो यूपी में 10 सीटों पर हो रही राज्यसभा चुनाव का भी गणित बदल जाएगा।

वर्तमान में विपक्षी गठबंधन के पास 119 विधायक हैं। रालोद ने एनडीए के साथ जाने की चर्चा शुरू की है, जिससे स्थिति बदल सकती है। अगर रालोद ने पाला बदला तो उनके पास 29 अतिरिक्त वोट होंगे। 10 सीटों को समीकरण समझिए।
        राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों में 9 भाजपा और 1 सपा के पास है। इस चुनाव में विधानसभा के सदस्य वोटर होते हैं। इस समय विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 399 है। राज्यसभा में निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम वोट का जो फॉर्म्युला है उसके हिसाब से इस बार एक सीट जीतने के लिए 37 विधायक की जरूरत होगी। इस हिसाब से मौजूदा स्थिति में भाजपा गठबंधन 7 और सपा गठबंधन 3 सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है।

रालोद पलटा तो यूं फंसेगा गणित
एनडीए के पास इस समय सहयोगियों को मिलाकर 277 वोट हैं। ऐसे में 37 का कोटा सबको आवंटित करने के बाद उसके पास 18 वोट अतिरिक्त बचेंगे। जनसत्ता दल उच्च सदन के चुनाव में अब तक भाजपा के ही साथ रहा है। इसलिए, इनके 2 वोट भी सत्ता पक्ष के साथ जाने तय हैं। ऐसे में भाजपा के पास 20 अतिरिक्त वोट होंगे। वहीं, विपक्षी गठबंधन के पास मौजूदा संख्या 119 विधायकों की है। कोटा आवंटित करने के बाद भी इस समय उनके पास 6 अतिरिक्त विधायक बचेंगे।
          अगर रालोद एनडीए के पाले में जाती है तो सपा गठबंधन के पास विधायकों की संख्या घटकर 110 हो जाएगी। सपा को अपना तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए 1 और विधायक की जरूरत होगी, जिसे तलाशना आसान नहीं होगा। वहीं, रालोद को मिलाकर भाजपा के पास 29 अतिरिक्त वोट हो जाएंगे। अब अगर भाजपा अपना आठवां उम्मीदवार उतारती है तो फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा, जिसमें सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए संभावनाएं बढ़ जाएंगी। फिलहाल, गुरुवार को भाजपा की ओर से 10 पर्चे खरीदे गए हैं।

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