सरकार व किसानों में नही बनी बात, अगली बातचीत 8 जनवरी को

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सरकार व किसानों में नही बनी बात, अगली बातचीत 8 जनवरी को

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- दिल्ली की कई सीमाओं समेत हरियाणा के कई जिलों में चल रहे किसान आंदोलन का 40वां दिन है। बीते 40 दिनों से किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए ठंड, बारिश, कोहरे और शीतलहर का प्रकोप झेल कर भी डटे हुए हैं। सोमवार को सरकार और अन्नदाताओं के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में कोई नतीजा नही निकल पाया है। सरकार व किसान आपस मे ंबात नही बना पाये जिसे देखते हुए अब अगली बैठक 8 जनवरी को होनी तय हुई है। एक तरफ किसान अभी भी तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने व एमएसपी की कानूनी गांरटी देने पर अड़े है वहीं केंद्र सरकार के तीन-तीन मंत्री किसानों की हर समस्या को सुलझाने का आश्वासन दे रह ेहै। हालांकि सरकार और किसानों में कई दोर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीता निकलकर सामने नही आया है। फिर भी कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का कहना है कि अगली बैठक में बात बन जायेगी और किसानों के साथ समझौता हो जायेगा। वहीं किसान अभी भी अपनी मांग पर अड़े हुए है।


उयर देश के किसानों का ये आंदोलन दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। जहां रविवार को यूपी गेट(दिल्ली-यूपी बॉर्डर) के अलावा किसानों नेे ज्ञानी बॉर्डर पर भी कब्जा कर लिया। वहीं राजस्थान से दिल्ली की ओर आ रहे किसानों पर देर रात हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें भी कीं। यह घटना गुरुग्राम से मात्र 16 किलोमीटर दूर रेवाड़ी अलवर मार्ग पर हुआ। जानकारी के अनुसार आज सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बैठे किसान इन किसानों को दिल्ली लाने मौके पर जाएंगे।

पूरा दिन किसान आंदोलन को लेकर चले घटनाक्रम की कुछ विशेष झलकियां इस प्रकार हैः-

कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं- टिकैत
राकेश टिकैत ने कहा कि 8 जनवरी 2021 को सरकार के साथ फिर से मुलाकात होगी। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर और एमएसपी दोनों मुद्दों पर 8 तारीख को फिर से बात होगी। हमने बता दिया है कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं। 

मैं आशावान हूं, अगली बैठक में निकलेगा हलः- नरेंद्र तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने बताया कि आज हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। बैठक का माहौल अच्छा था लेकिन किसान संगठनों के कानून रद्द कराने की मांग पर अड़े रहने के कारण कोई हल नहीं निकला। लेकिन मैं आशावान हूं कि अगली बैठक जो 8 जनवरी को होगी उसमें कोई न कोई नतीजा निकलेगा। हमने किसानों को क्लॉज वाइज चर्चा करने को कहा और कुछ चर्चा एमएसपी पर भी हुई। हमें उम्मीद है कि आज की जैसी बात रही उसके हिसाब से अगली बैठक में हल निकलेगा।

8 जनवरी को फिर होगी बैठक
केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच चल रही बैठक खत्म हो गई है। अब इनकी अगली बैठक 8 जनवरी को होगी। किसान नेता प्रोफेसर दर्शन पाल ने कहा कि इस बैठक का ज्यादा कुछ खास नतीजा नहीं निकला।

प्रियंका के ट्वीट पर बोले केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह- ऐसे लोगों को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने किसानों को लेकर प्रियंका गांधी के ट्वीट पर कहा कि, कांग्रेस के पास किसानों और ग्रामीण मजदूर की समझ रखने वाला कोई नेता नहीं है। उन्हें ही नहीं पता कि उन्होंने 2 साल पहले क्या बोला और 2 दिन पहले क्या बोला। इसलिए ऐसे लोगों को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

सरकार और किसानों ने नहीं खाया साथ खानाि
आज की बैठक के दौरान लंच ब्रेक में किसानों ने मंत्रियों के साथ खाने से इनकार कर दिया और उनके साथ नहीं खाया।

अगर बिचैलिए हटेंगे तो किसान की आय बढ़ेगी- कमल पटेल 
किसान नेताओं की सरकार से वार्ता पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कमल पटेल ने कहा कि अगर बिचैलिए हटेंगे तो किसान की आय बढ़ेगी, अब किसान को आर्थिक आजादी मिली है, इसलिए पूरे देश का किसान मोदी जी के साथ है। अगर किसान नेता चाहते हैं कि किसान का भला हो, तो वो इस कानून का समर्थन करेंगे। 

भाजपा की सरकार पर किसानों को बिल्कुल भरोसा नहीं है- अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा की सरकार पर किसानों को बिल्कुल भरोसा नहीं है। मंडी बंद कर दी, मंडी बेच दी, कितने किसानों पर आंसू गैस के गोले चलाए गए, कितनों की हत्या हो गई, कितनों ने आत्महत्या कर ली और कितनों की जानें चली गई लेकिन सरकार को परवाह नहीं है। 
 
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल, सोमप्रकाश ने रखा मौन
विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल, सोमप्रकाश ने किसान नेताओं के साथ विज्ञान भवन में दो मिनट का मौन रखा।और सरकार, अफसरों और किसान नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
 
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा- प्रजा की बात मानने से कोई शासक छोटा नहीं होता
किसानों के साथ सरकार की बैठक पर कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, देश सरकार की तरफ देख रहा है। सरकार से आग्रह है कि किसानियत नहीं तो कम से कम इंसानियत को देखते हुए, प्रजा की बात मानने से कोई शासक छोटा नहीं होता।

किसानों के हौसले को सलाम, केंद्र से गुजारिश वापस ले काले कानूनः- केजरीवाल
केजरीवाल ने किसान आंदोलन को लेकर आज कहा है कि, ठंड और बारिश के बीच सड़कों पर डटे हमारे किसानों के हौंसले को सलाम। मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि आज की बैठक में किसानों की सारी मांगें मानते हुए तीनों काले कानून वापस लिए जाएं।

शिव कुमार कक्का ने किया ये बड़ा दावा
किसान नेता शिव कुमार कक्का ने बैठक से पहले कहा कि मोदी सरकार डब्ल्यूटीओ जाकर हस्ताक्षर कर चुकी है कि वह किसानों का उत्पाद समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदेगी। इसलिए हम ये आंदोलन कर रहे हैं और एमएसपी पर कानून चाहते हैं।

प्रियंका गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
किसानों के आंदोलन के बीच एक बार फिर प्रियंका गांधी ने सराकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि सरकार एक तरफ तो किसानों को बातचीत के लिए बुलाती है दूसरी तरफ इस कड़कड़ाती ठंड में उन पर आंसू गैस के गोले बरसा रही है। इसी अड़ियल और क्रूर व्यवहार की वजह से अब तक लगभग 60 किसानों की जान जा चुकी है। किसान कैसे विश्वास करे इस क्रूर सरकार पर?
 
सीएम खट्टर जनरल डायर की तरह किसानों पर फायर करवा रहे हैंः राघव चड्ढा
हरियाणा में बीती रात किसानों पर छोड़े गए आंसू गैस के गोलों की घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर पर निशाना साधा है। आप विधायक राघव चड्ढा ने कहा है कि, श्सीएम खट्टर जनरल डायर की तरह हैं जो किसानों पर फायर करवा रहे हैं, आंसू गैस के गोले उन पर प्रयोग करवा रहे हैं। क्या देश के किसान हमारे दुश्मन हैं? क्या वो चीन या पाकिस्तान के सैनिक हैं? यह बेहद शर्मनाक है।
 
राहुल गांधी बोले- सरकार की क्रूरता के दृश्य देखने के बाद अब कुछ देखना शेष नहीं
ठंड और बारिश में भी अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमा पर डटे अन्नदाताओं की दशा और सरकार के रवैये पर राहुल गांधी ने एक बार फिर ट्वीट कर सवाला उठाया है। उन्होंने लिखा, सर्दी की भीषण बारिश में टेंट की टपकती छत के नीचे जो बैठे हैं, सिकुड़-ठिठुर कर वो निडर किसान अपने ही हैं, गैर नहीं। सरकार की क्रूरता के दृश्यों में अब कुछ और देखने को शेष नहीं।
 
सिंघु बॉर्डर पर बढ़ाई सुरक्षा
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात है। खबर है कि यहां रेवाड़ी से किसान आ सकते हैं। आज किसानों और केंद्र सरकार की बैठक होनी है।
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात है। आज किसानों और केंद्र सरकार की बैठक होगी।

लंबे समय तक आंदोलन में भाग लेने के कारण कमर दर्द का शिकार हो रहे किसान
सिंघु बॉर्डर पर दिनभर आंदोलन का हिस्सा बने रहने के कारण कई किसान कमर दर्द के भी शिकार हो रहे हैं। इस मर्ज के लिए न सिर्फ वे मेडिकल कैंप का रूख कर रहे हैं बल्कि आयुर्वेदिक दवाईयों से भी मर्ज को दूर कर रहे हैं। वहीं, सर्वाइकल, दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर व मधुमेह समेत अन्य बीमारियां भी किसानों का मर्ज बनी हुई हैं।

राजनाथ से मिल तोमर ने गतिरोध खत्म कराने की रणनीति पर की चर्चा
किसान संगठनों के साथ सातवें दौर की वार्ता से पहले कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर गतिरोध समाप्त कराने की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान तोमर ने संकट पर बीच का रास्ता निकालने के लिए सभी संभव विकल्पों पर चर्चा की। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्रालय संभाल चुके राजनाथ किसानों के साथ मौजूदा गतिरोध समाप्त करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पर्दे के पीछे राजनाथ इस मुद्दे को निपटाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर मनाएंगे लोहड़ी
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान नेता मनजीत सिंह राय ने कहा, हम इस बार 13 जनवरी को लोहड़ी पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे। इसके अलावा 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को आजाद हिंद किसान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। राय ने लोगों से 6-20 जनवरी तक किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करने की अपील की। 

आज वार्ता असफल रही तो किसान कब्जा करेंगे केेएमपी व केजीपी
सोमवार को होने वाली वार्ता असफल होने पर किसान केेएमपी व केजीपी पर कब्जा कर लेगा। 6 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। किसान केएमपी-केजीपी के रास्ते सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर व चिल्ला बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होंगे। रैली के लिए 5 जनवरी को गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। पाल व खापों के हिसाब से जिम्मेदारी तय की जाएगी। भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का ने इस संबंध में किसानों से वार्ता भी की। 

किसानों ने कहा- भगवान हमारे साथ, बारिश के बाद नहीं होगी सिंचाई की जरूरत
रविवार को भारी बारिश के बीच किसान पंडालों में डटे रहे। बारिश की परवाह किए बिना जुलूस निकालते हुए धरना स्थल पर पहुंचे। वहीं पूरे दिन लंगर भी चलता रहा। किसानों का कहना है कि भगवान भी उनके साथ है। किसान सड़कों पर हैं, तो बारिश ने खुद उनके खेतों की सिंचाई कर दी। ऐसे में अब फसलों में पानी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खेतों पर डटा किसान भी अब धरने में शामिल होगा।

वार्ता असफल रही तो आंदोलन होगा तेज
पिछले 40 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन की नजर अब सोमवार को केंद्र सरकार के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी हुई है। वार्ता असफल रही तो निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। वहीं अब तक अपने खेतों में सिंचाई करने वाले किसान भी बारिश के बाद राहत में हैं। सोमवार से वे भी धरने में शामिल होंगे। वहीं छह जनवरी से लेकर 26 जनवरी तक के कार्यक्रम को लेकर किसान बैठकों में व्यस्त हैं। 

पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड से आए किसान
भाकियू अंबावता के प्रदेश अध्यक्ष सचिन शर्मा ने बताया कि सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर यहां पर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, अलीगढ़, गाजियाबाद समेत उत्तराखंड के किसानों ने उनके साथ यहां पर पहुंचकर ज्ञानी बॉर्डर पर कब्जा किया है।

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