TDP को स्पीकर का पद देने से क्यों कतरा रही है BJP?

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TDP को स्पीकर का पद देने से क्यों कतरा रही है BJP?

-नरेंद्र मोदी तीसरी बार भारतीय प्रधानमंत्री पद की लेंगे शपथ

नई दिल्ली/अनिशा चौहान/- एनडीए की शुक्रवार को हुई बैठक में यह साफ हो गया है कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार भारतीय प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। हालांकि, रेलवे, रक्षा, विदेश जैसे मंत्रालयों का अभी तक सांसदों के बीच बंटवारा नहीं हुआ है। इस बीच खबर आ रही है कि मोदी 3.0 को अहम समर्थन देने वाली TDP पार्टी स्वास्थ्य और कृषि मंत्रालय के साथ-साथ स्पीकर का पद भी मांग रही है। आइये जानते हैं स्पीकर के पास क्या ताकत है जो TDP मांग रही है।

यह पहली बार नहीं है कि TDP लोकसभा अध्यक्ष का पद चाह रही है। इससे पहले 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 दिन में गिर गई थी, तब TDP सांसद जीएम बालयोगी स्पीकर की कुर्सी पर थे। ये पद उन्हें वाजपेयी सरकार ने दिया था। कहा जाता है कि स्पीकर के तौर पर जीएम बालयोगी के फैसले की वजह से अटल बिहारी वाजपेई की सरकार अविश्वास प्रस्ताव में हार गई थी।

लोकसभा अध्यक्ष क्या करता है?

अध्यक्ष लोकसभा का अध्यक्ष होता है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सदन की बैठकें ठीक से संचालित हों। सदन में व्यवस्था बनाए रखना लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है और इसके लिए वह निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई भी कर सकते हैं। इसमें सदन को स्थगित करना या निलंबित करना शामिल है।

बैठक का एजेंडा क्या है, किस बिल पर कब वोटिंग होगी, कौन वोट कर सकता है आदि सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिया जाता है। विपक्ष के नेता को मान्यता देना भी स्पीकर की जिम्मेदारी है। जब सदन का सत्र चल रहा हो तो सैद्धांतिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी दल से जुड़ा नहीं होता बल्कि पूर्णतया निष्पक्ष होता है।

TDP को स्पीकर का पद देने से क्यों कतरा रही है BJP?

लोकसभा स्पीकर के पास बहुत ताकत होती है, लेकिन सिर्फ इसी वजह से BJP स्पीकर का पद TDP को देने से नहीं हिचकिचा रही है। दरअसल, साल 1999 में अटल बिहार वाजपेयी सरकार के अविश्वास प्रस्ताव को हराने में TDP स्पीकर ने बेहद अहम भूमिका निभाई थी।

17 अप्रैल 1999 को वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। कहा जा रहा था कि वह सदन में बहुमत साबित करेंगे। लेकिन आखिरी वक्त पर कांग्रेस सांसद गिरधर गमांग ने बाजी पलट दी। हालाँकि गिरधर गमांग कांग्रेस सांसद थे, लेकिन फरवरी 1999 में वे ओडिशा के मुख्यमंत्री बने। लेकिन फिर भी उन्होंने सांसद की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया और वे 17 अप्रैल को लोकसभा पहुंचे। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष को यह तय करना था कि कांग्रेस सांसद को वोटिंग का अधिकार मिलेगा या नहीं।

स्पीकर जीएम बालयोगी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फैसला सुनाया कि गिरधर गमांग अपने विवेक के आधार पर वोट कर सकते हैं। कांग्रेस के गमांग ने वाजपेयी सरकार के खिलाफ वोट किया और इस एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी सरकार गिर गई। तब सरकार के पक्ष में 269 और विपक्ष में 270 वोट पड़े थे। इसलिए BJP पार्टी चाहेगी कि स्पीकर का पद उसके किसी सांसद को मिले।

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