त्याग, बलिदान व समर्पण के पर्याय थे श्रद्धानंद -सांसद स्वामी सुमेधानंद

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August 25, 2026

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त्याग, बलिदान व समर्पण के पर्याय थे श्रद्धानंद -सांसद स्वामी सुमेधानंद

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में स्वतन्त्रता सेनानी, समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानन्द जी के 94 वे बलिदान दिवस पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया। यह कॅरोना काल में परिषद का 139 वा वेबनार था ।
सांसद स्वामी सुमेधानंद(सीकर, राजस्थान) ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद सर्वस्व त्याग,बलिदान और समर्पण के पर्याय थे । उन्होंने समाज के लिए अपना सब कुछ आहूत कर दिया । आज शुद्धि आंदोलन के तीव्र गति से चलाने की आवश्यकता है जब तक घर वापिसी का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा तब तक हिन्दू समाज व राष्ट्र मजबूत नहीं होगा । स्वामी दयानंद सरस्वती से हुई एक भेंट ने उनका सम्पूर्ण जीवन की दिशा व दशा ही बदल डाली । उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद भयभीत अमृतसर में कांग्रेस के स्वागताध्यक्ष बनकर अधिवेशन सफल करवाया व हिंदी भाषण की शुरुआत की वह उनकी संगठन शक्ति व नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है ।
समारोह अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार चैहान(संस्थापक अध्यक्ष, एमिटी शिक्षण संस्थान) ने कहा कि समाज सुधारक के रूप में उनके जीवन का अवलोकन करें तो पाते हैं कि उन्होंने प्रबल विरोध के बावजूद स्त्री शिक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाई व गुरूकुलीय शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित किया ।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान भवन दयनीय स्थिति में दिल्ली के नया बाजार में है,केंद्र सरकार से अनुरोध है कि उसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए जिससे आने वाली नयी पीढ़ी दीर्घकाल तक प्रेरणा ले सके । उनके बलिदान दिवस पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
हरियाणा राज्य के ओषधि नियंत्रक नरेंद्र आहूजा विवेक ने कहा कि जब स्वामी जी ने स्वयं की बेटी अमृत कला को विद्यालय से आकर श्एक बार ईसा-ईसा बोल, तेरा क्या लगेगा मोल गाते सुना तो घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा कर गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय की स्थापना हरिद्वार में स्थापना कर दी व अपने बेटे हरीश्चंद्र और इंद्र को सबसे पहले भर्ती करवाया। स्वामी जी का विचार था कि जिस समाज और देश में शिक्षक स्वयं चरित्रवान नहीं होते उसकी दशा अच्छी हो ही नहीं सकती।
वैदिक विद्वान आचार्य गवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि अमर हुतात्मा,माँ भारती के महान सपूत, ऋषि दयानंद सरस्वती और आर्य समाज के निर्भीक सिपाही, गुरूकुल कांगड़ी और ऐसे अनेकों गुरूकुलो के निर्माता, ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व जिनकी विशेषता बताने के लिए हर विशेषण कम है स्वामी श्रृद्धानंद सरस्वती जी को उनके बलिदान दिवस पर कोटिशः शत-शत नमन। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा की भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरणसिंह ने किसानों में अपने हकों के लिए संघर्ष की अलख जलाई थी। किसान की एक नजर खेत की मेड़ पर और दूसरी निगाह दिल्ली की संसद पर होनी चाहिए, पूर्व प्रधानमंत्री का ये संदेश उनकी दूरदृष्टि की मिसाल रहा है। योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि सादगी, ईमानदारी और अथक मेहनत से किसानों के महान नेता बने चैधरी चरण सिंह की 118 वीं जयंती पर उनकी यादें और बातें आज भी नहीं भूलती हैं।उनकी याद में आज का दिन किसान दिवस के रूप में देशभर में मनाया जाता है। इस अवसर पर गायिका उर्मिला आर्या, बिन्दु मदान,काशीराम आर्य,मृदुला अग्रवाल, राजश्री यादव, आशा आर्या, बिमला आहूजा, जनक अरोड़ा, रविन्द्र गुप्ता, किरन सहगल आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर आनन्द प्रकाश आर्य(हापुड़), ओम सपरा, आचार्य महेन्द्र भाई, आनन्द प्रकाश आर्य, यशोवीर आर्य, धर्मपाल आर्य, रामकुमार आर्य, अरुण आर्य, व्यायामाचार्य सूर्यदेव, कमलेश हसीजा, वेदव्रत बेहरा (उड़ीसा), सुरेश आर्य, अशोक जांगड़(रोहतक) आदि उपस्थित थे।

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