अहिंसा की ताकत के सामने नतमस्तक हुई म्यांमार सेना

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अहिंसा की ताकत के सामने नतमस्तक हुई म्यांमार सेना

-प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाती सेना को नन ने ललकारा, कहा- पहले मुझे गोली मारो, यह सुनकर सैनिक हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ गए

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/यांगून/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा रहे सैनिक उस समय नतमस्तक हो गये जब एक नन ने उन्हे ललकारतें हुए कहा कि निर्दोषों पर गोली चलाने से पहले उस पर गोली चलाई जाये। नन सिस्टर एन रोज नू तावंग ने इसके लिए न केवल अहिंसा का सहारा लिया बल्कि सेना के सामने अवरोध बनकर खड़ी हो गईं जिसे देखते हुए सैनिकों ने बंदूकें नीचे कर लीं और हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ गए।
म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ चल रहे विरोध को दबाने के लिए सैनिक लगातार गोलियां बरसा रहे हैं। अब तक 68 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। यहां मंगलवार को काचिन के मायित्किना में गोलियां बरसा रहे सैनिकों के सामने नन सिस्टर एन रोज नू तावंग खड़ी हो गईं। सैनिकों से कहा, ‘बच्चों, महिलाओं, प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना बंद कीजिए। सबसे पहले मुझे गोली मारिए…। मैं तब तक नहीं हटूंगी, जब तक आप यहां से नहीं चले जाते या मेरी मौत नहीं हो जाती।’ सिस्टर रोज के तेवर देख सैनिकों ने बंदूकें नीचे कर लीं और हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ गए। बाद में अधिकारियों ने नन को भरोसा दिया कि अब और खून-खराबा नहीं होगा, तब सिस्टर रोज वहां से हटीं। हालांकि हिरासत में लिए गए 200 छात्रों के समर्थन में म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून में मंगलवार को भी प्रदर्शन हुआ। लोगों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया। इन प्रदर्शनों की कवरेज करने पर सैन्य सरकार ने देश के पांच मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
म्यांमार में तख्तापलट के बाद से ही लोग सैन्य शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हर बार सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती है। सत्ता संभाल रही सेना ने लोकतंत्र समर्थकों से सख्ती से निपटने की बात कही है। देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद से ही म्यांमार में प्रदर्शनों का दौर जारी है। नवंबर में हुए चुनाव में सू की पार्टी ने जोरदार जीत दर्ज की थी, लेकिन सेना ने धांधली की बात कहते हुए परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
यूनाइटेड नेशन में म्यांमार के राजदूत क्यॉ मो तुन इस घटना के बारे में बताते हुए रो पड़े थे। तुन ने यूएन से अपील की थी कि म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को फौरन बहाल करने की मांग की थी। म्यांमार के सैन्य शासन ने न्छ में सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले अपने राजदूत को पद से बर्खास्त कर दिया है।

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