नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामलों पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर महिला लंबे समय तक संबंधित शख्स के साथ शारीरिक संबंध बना रही है तो इसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में एक महिला ने अपील दाखिल की थी। इसमें शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले एक शख्स को बरी करने को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने महिला की याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने की यह टिप्पणी
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा कि अगर शारीरिक संबंध लंबे वक्त तक चलता रहे तो इसमें शादी के वादे को शारीरिक संबंध के लिए लालच के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शादी का झूठा वादा करके सेक्स करने के लिए लालच के तौर पर तब कहा जा सकता है, जब पीड़ित महिला किसी एक पल के लिए इसका शिकार होती है। ऐसा तब हो सकता है, जब लालच देने वाला शख्स अपनी बात पर टिका हुआ नहीं रह सकता है। ऐसे मामले में हो सकता है कि एक बार को सहमति मिल जाए, लेकिन असल में महिला सेक्स के लिए मना करना चाहती हो।
इस तरह बन सकता है दुष्कर्म का मामला
उच्च न्यायालय ने यह बात भी कही कि अगर शादी का झूठा वादा केवल महिला से सेक्स करने की नीयत से किया जाता है और पीड़िता की सहमति का गलत इस्तेमाल है तो इस मामले में आईपीसी की धारा 375 के तहत रेप का केस दर्ज होता है। हालांकि, ऐसे संबंध अगर लंबे वक्त तक रहे, जिसमें सेक्स शामिल है तो यह नहीं माना जा सकता कि महिला ने मर्जी न दी हो या दोनों के बीच प्यार न हो। साथ ही, यह भी नहीं माना जा सकता है कि महज शादी का झूठा वादा करके महिला को शारीरिक संबंधों के लिए राजी किया गया था।


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