AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल की बढ़ी मुसीबत, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 3, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल की बढ़ी मुसीबत, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

-दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के उल्लंघन के तहत की कार्रवाई

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम (पीपीए) के कथित उल्लंघन की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। दिल्ली पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की और बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

इससे पहले मामले की सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल और मटियाला सीट से विधायक गुलाब सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस ने शिकायत पर जांच नहीं की ऐसे में होर्डिंग किसने लगाए और क्यों लगाए इसकी जांच जरूरी है। अदालत ने पुलिस को 18 मार्च तक मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले 2022 में द्वारका स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया था। जिसके बाद सत्र न्यायालय ने इसे दोबारा सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया था।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नेहा मित्तल ने अपने आदेश में कहा था कि पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट में लिखा है कि स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने की तारीख में बताए गए स्थान पर कोई होर्डिंग या बैनर नहीं दिखाई दिया है। जबकि शिकायत की तारीख पर बैनर होर्डिंग की स्थिति पर पुलिस ने चुप्पी साध ली है। ऐसे में यह जरूरी है कि इस मामले की जांच की जाए कि होर्डिंग बैनर किसने औऱ क्यों लगाए हैं। राज्य की तरफ से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि समय बहुत अधिक हो चुका है और साक्ष्य के तौर पर दाखिल की गई तस्वीरों में होर्डिंग और बैनर बनाने वाली कंपनी या संस्था का नाम नहीं लिखा है। जिसे अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि यह जरूरी है कि मामले में शामिल लोगों की पहचान सामने आए। इसके लिए जांच आवश्यक है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox