
नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। लगातार गिरती हवा की गुणवत्ता और रिकॉर्ड तोड़ एक्यूआई को देखते हुए क्षेत्र में GRAP-4 की सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं। इसी बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण संकट को लेकर विस्तृत सुनवाई की और कई अहम मुद्दों पर टिप्पणी की।
स्कूल बंद करने पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान स्कूलों को बंद किए जाने का सवाल उठा। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि स्कूल बंद होने से गरीब बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, क्योंकि वे मिड-डे मील जैसी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में फैसले विशेषज्ञों पर छोड़ने चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्कूलों की छुट्टियां जारी रहेंगी और उम्मीद जताई कि छुट्टियों के खत्म होने से पहले प्रदूषण का स्तर सुधर जाए।
‘वकील ही बन जाते हैं विशेषज्ञ’
सुनवाई के दौरान जब एक अन्य वकील ने अपनी दलील पेश करने की कोशिश की, तो सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में अक्सर विशेषज्ञों की राय कम और वकीलों की राय ज्यादा सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि यही समस्या है कि वकील ही विशेषज्ञ की भूमिका निभाने लगते हैं, जबकि ऐसे मुद्दों पर तकनीकी और वैज्ञानिक सलाह ज्यादा जरूरी है।
निर्माण श्रमिकों के मुद्दे पर निर्देश
प्रदूषण प्रतिबंधों के चलते काम ठप होने से प्रभावित निर्माण श्रमिकों का मुद्दा भी कोर्ट के सामने आया। मजदूर संगठनों की ओर से पेश वकील ने भत्ते के भुगतान में देरी की बात रखी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि प्रतिबंधों के कारण बेकार बैठे निर्माण श्रमिकों की पहचान कर उनके खातों में सीधे धनराशि भेजी जाए। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार श्रमिकों के लिए वैकल्पिक रोजगार की संभावनाओं पर विचार करे।
श्रमिकों की राशि पर सख्त रुख
दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि करीब 2.5 लाख निर्माण श्रमिकों में से 7,000 का सत्यापन पूरा हो चुका है और उनके खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि श्रमिकों के खातों में भेजी गई राशि कहीं और स्थानांतरित नहीं होनी चाहिए और इसका पूरा हिसाब रखा जाए।
टोल प्लाजा से बढ़ते प्रदूषण पर सवाल
सुनवाई के दौरान दिल्ली के टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और उससे होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्यों न जनवरी तक टोल प्लाजा हटाने या बंद करने पर विचार किया जाए। सीजेआई सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में सरकार सिर्फ राजस्व के लिए शहर के भीतर ही टोल प्लाजा बना दे।
9 टोल प्लाजा बंद करने पर विचार का आदेश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली सरकार के 9 टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाए। इस पर फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह की समयसीमा भी तय की है।





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