उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन, किसके पास है जीत का गणित?

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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन, किसके पास है जीत का गणित?

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- देश में आज (9 सितंबर) उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। एनडीए की ओर से उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन मैदान में हैं, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को प्रत्याशी बनाया है। आज शाम या देर रात तक मतगणना पूरी हो जाएगी और देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि चुनावी समीकरण कैसे बनते हैं, कौन मतदान करता है और जीत का आंकड़ा कितना है।

उपराष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है?
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – के सांसद मिलकर करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट पद्धति से संपन्न होता है। राष्ट्रपति चुनाव से यह इसलिए अलग है क्योंकि उसमें सांसदों के साथ-साथ विधायक भी वोट डालते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव केवल सांसदों तक सीमित होता है। राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी वोट देने के अधिकारी होते हैं।

वर्तमान में कितने सांसद वोट डालेंगे?
लोकसभा की कुल ताकत 543 है, लेकिन बशीरहाट सीट रिक्त होने के कारण इस बार 542 सांसद वोट डालेंगे।
दूसरी तरफ, राज्यसभा की कुल संख्या 245 है, लेकिन छह सीटें खाली हैं। यानी 239 सदस्य मौजूद हैं। इनमें 227 निर्वाचित और 12 मनोनीत सदस्य शामिल हैं। इस तरह कुल मिलाकर दोनों सदनों से 781 सांसदों को मतदान का अधिकार है।

हालांकि, बीजू जनता दल (BJD) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इस चुनाव से दूर रहने का ऐलान किया है। बीजद के सात और बीआरएस के चार सांसद वोटिंग में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में कुल वोटरों की संख्या घटकर 770 रह जाएगी।

जीत का जादुई आंकड़ा
जब सभी सांसद शामिल होते तो बहुमत का आंकड़ा 391 होता, लेकिन बीजद और बीआरएस के दूर रहने के बाद अब उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए 386 वोट पर्याप्त होंगे। किसी भी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के आधार पर यह संख्या हासिल करनी होगी। अगर किसी को पहले चरण में बहुमत नहीं मिलता, तो दूसरी वरीयता के वोट गिने जाएंगे और उसके बाद विजेता तय होगा।

समीकरण और संभावनाएं
एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच यह चुनाव सीधा मुकाबला माना जा रहा है। एनडीए की ओर से भाजपा के अलावा उसके सहयोगी दल भी समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी गठबंधन अपने संयुक्त उम्मीदवार को जीताने की रणनीति पर काम कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कई बार सांसद अपनी पार्टी लाइन से हटकर वोट कर देते हैं, जिससे नतीजों पर असर पड़ सकता है।

नतीजों पर सबकी नजर
आज शाम या रात तक यह साफ हो जाएगा कि देश का नया उपराष्ट्रपति कौन होगा। यह चुनाव केवल सत्ता और विपक्ष के बीच ताकत की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह भी बताएगा कि आने वाले समय में संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में कौन-सा गठबंधन कितनी मजबूती से खड़ा होगा।

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