मुंबई/अनीशा चौहान/- मालेगांव ब्लास्ट केस में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित सहित अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश लाहोटी ने स्पष्ट किया कि किसी को केवल शक के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि बाइक में बम रखे जाने, कश्मीर से आरडीएक्स लाने, और कर्नल पुरोहित की भूमिका से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले।
केस की जांच का सफर
29 सितम्बर 2008 की रात महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में रमजान के महीने में भिक्खू चौक पर बम विस्फोट हुआ था, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। घटना के दो सप्ताह बाद पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी शामिल थे।
शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की और जनवरी 2009 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में 2011 में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया। मार्च 2016 में एनआईए ने पूरक चार्जशीट पेश की और मकोका की धाराएं हटा ली गईं।
साध्वी प्रज्ञा की प्रतिक्रिया
अदालत का फैसला आने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, मुझे 13 दिनों तक प्रताड़ित किया गया। अपने ही देश में आतंकवादी बना दिया गया। 17 साल तक अपमान सहा। मेरा जीवन बर्बाद हो गया था। लेकिन आज मैं कह सकती हूं कि यह मेरी नहीं, भगवा की जीत है। हिंदुत्व की विजय हुई है। जिन्होंने भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद जैसे शब्द बोले, उन्हें दंड मिलेगा।” प्रज्ञा ठाकुर ने यह भी कहा कि उनके जीवन का उद्देश्य अब पूरा हो गया है और वह इस फैसले से संतुष्ट हैं।


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