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June 10, 2026

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पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन से की बातचीत,

-क्षेत्र में बढ़े तनाव पर जताई चिंता, सभी से संयम बरतने की अपील की

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- इजराइल-ईरान युद्ध के बीच अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत की। इसे लेकर पीएम मोदी ने एक्स पर जानकारी दी है। पीएम ने लिखा- हमने मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा की है और हाल ही में बढ़े तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चमि एशियाई क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हालिया घटनाक्रमों पर गंभीर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी एक्स पर एक पोस्ट में साझा की है। पीएम मोदी ने लिखा- हमने वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। हालिया तनावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। तुरंत तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने का आह्वान दोहराया, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता शीघ्र बहाल हो सके। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संकट का समाधान हैं।

पीएम मोदी और मसूद पेजेशकियन के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें क्षेत्र में शांति की बहाली पर टिकी हैं।

अमेरिकी हमलों ने बढ़ाया खतरा- संयुक्त राष्ट्र
उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका के हमलों से गंभीर रूप से चिंतित हैं। अब इस बात का खतरा बढ़ रहा है कि इस्राइल-ईरान संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर हो सकता है। इसके नागरिकों, क्षेत्र और दुनिया के लिए भयावह परिणाम होंगे। मैं सदस्य देशों से तनाव कम करने का आह्वान करता हूं। कोई सैन्य समाधान नहीं है। आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता कूटनीति है।

पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप से बढ़ती है अस्थिरता- चीन
चीन की सरकारी मीडिया ने कहा कि अमेरिकी हमले एक खतरनाक मोड़ हैं। 2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण का हवाला देते हुए सीजीटीएन के लेख में कहा गया है कि इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि मध्य पूर्व में सैन्य हस्तक्षेप अक्सर अनपेक्षित परिणाम उत्पन्न करते हैं। इनमें लंबे समय तक संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता शामिल है। इसलिए जरूरी है कि बातचीत को प्राथमिकता देते हुए संतुलित, कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया जाए।

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