
ज्योतिर्मठ/चमोली/अनीशा चौहान/- 02 जून 2025 को भगवान कार्तिक स्वामी जी की ऐतिहासिक तीर्थ यात्रा ने ज्योतिर्मठ (चमोली) स्थित नरसिंह मंदिर और नव दुर्गा मंदिर के दर्शन करने के पश्चात श्री बद्रीनाथ धाम की ओर प्रस्थान किया। यह यात्रा उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के पौराणिक क्रौंच पर्वत से 28 मई को आरंभ हुई थी।

भव्य विदाई में झलकी भक्ति और परंपरा
भगवान के दर्शनों के लिए नरसिंह मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भजन-कीर्तन, गाजे-बाजे, और धारियों व देवी-देवताओं के निशानों के साथ यात्रा को बद्रीनाथ हाईवे तक पारंपरिक विधि से विदा किया गया। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

वसुधारा सहित कई तीर्थ स्थलों का होगा दर्शन
भगवान कार्तिकेय की यह आठ दिवसीय यात्रा न केवल बद्रीनाथ धाम तक सीमित है, बल्कि इसमें सत्य पथ, वसुधारा, और अन्य पावन तीर्थ स्थलों के भी दर्शन होंगे। यह यात्रा धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का एक अद्भुत संगम है।
घीमतौली क्षेत्र के आराध्य हैं कार्तिक स्वामी
यह यात्रा रुद्रप्रयाग जिले के तल्ला नागपुर की सीमांत ग्राम पंचायत घीमतौली के सुवारी ग्वास क्षेत्र से जुड़ी है, जहां भगवान कार्तिकेय को ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है। इस तीर्थ यात्रा को वहां की संस्कृति और धार्मिक भावनाओं से गहरा जुड़ाव प्राप्त है।
4 जून को समाप्त होगी यात्रा, 5 जून से महायज्ञ का आयोजन
यह आध्यात्मिक यात्रा आगामी 4 जून को क्रौंच पर्वत में समाप्त होगी। इसके उपरांत 5 जून से जनकल्याण हेतु एक विशेष महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। महायज्ञ में क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं की विशेष भागीदारी की संभावना है।





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