VVPAT पर SC का बड़ा फैसला, सभी याचिकाएं की खारिज

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 11, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

VVPAT पर SC का बड़ा फैसला, सभी याचिकाएं की खारिज

-EVM से ही होगा मतदान -बैलेट पेपर की मांग भी खारिज

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- VVPAT मामले पर कई दिनों से चल रही सुनवाई के बाद चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से आज बड़ी राहत मिल गई है। ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के द्वारा डाले गए वोटो के साथ वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियां के मिलान वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया है। लोकसभा चुनाव के जारी दूसरे चरण की वोटिंग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के जरिए डाले गए वोट की वीवीपैट की पर्चियों से शत प्रतिशत मिलन की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपंकर दत्ता ने साफ कहा कि हमने वीवीपैट से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने आदेश में चुनाव आयोग से कहा कि सिंबल लोडिंग यूनिट को 45 दिन तक सुरक्षित रखा जाए, कोर्ट ने कहा की आंख मूंदकर एक बनी बनाई व्यवस्था पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते हैं। अगर कोई प्रत्याशी वेरिफिकेशन की मांग करता है, तो इसका खर्चा भी उसी से वसूला जाएगा अगर ईवीएम में कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसका खर्चा वापस किया जाएगा।
दरअसल, कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके एवं और वीवीपैट की पर्चियां के शत प्रतिशत मिलन की मांग की थी। इससे पहले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्याय मूर्ति संजीव खन्ना के अध्यक्षता वाली पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, स्पीड में न्याय मूर्ति दीपंकर दत्ता भी शामिल थे इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम से संबंधित कुछ तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी को बुलाया था।

पिछले हफ्ते पीठ ने इस मामले में कई जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, उसने कहा था कि आधिकारिक कृत्यों को आम तौर पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत वैध माना जाता है और चुनाव आयोग द्वारा की गई हर चीज पर संदेह नहीं किया जा सकता है। केंद्र सरकार के दूसरे सर्वोच्च कानूनविद, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चुनाव की पूर्व संध्या पर समय-समय पर जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ताओं की आलोचना करते हुए कहा था, कि मतदाता की लोकतांत्रिक पसंद को मजाक में बदल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने पहले ही इसी तरह की राहत की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox