कवियों के यश व कीर्ति के नये कीर्तिमान स्थापित कर रही श्री साहित्य सरगम संस्था

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March 8, 2026

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कवियों के यश व कीर्ति के नये कीर्तिमान स्थापित कर रही श्री साहित्य सरगम संस्था

-वरिष्ठों को सम्मान व नवोदितों को पहचान देने में सक्षम है श्री साहित्य सरगम

बहादुरगढ़/- देश और दुनिया में हरियाणा का नाम रोशन करने वाले प्रख्यात हास्य कवि अनिल अग्रवंशी द्वारा स्थापित नयी साहित्यिक संस्था श्री साहित्य सरगम अपने नाम के अनुरूप यश व कीर्ति के भी नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। बीती शाम प्रशांत विहार में आयोजित काव्योत्सव में भी जहां दिल्ली, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक कवियों, कवयित्रियों ने अपनी काव्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया,वहीं कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ कवियों ने उन्हें सुना व सराहा। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष अग्रवंशी ने अतिथियों का परिचय कराने के अलावा श्री साहित्य सरगम की स्थापना, इसके उद्देश्यों व कार्यशैली से संबंधित जानकारी देते हुए इसके कार्यक्रमों से लगातार जुड़े रहने का आह्वान किया।
                प्रतियोगिता सत्र के दौरान दस कवियों ने मां के विषय में एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस सत्र में निर्णायक की भूमिका में उपस्थित  मुख्य अतिथि व दिल्ली नगर निगम रोहिणी जोन की डिप्टी चेयरपर्सन रहीं कवयित्री ऋतु गोयल व संस्था के मुख्य सलाहकार अंतर्राष्ट्रीय कवि राजेश चेतन ने लखनऊ की कवयित्री प्रीति त्रिपाठी व कवि दिनेश छिमवाल को प्रथम व द्वितीय पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की। इस सत्र का संचालन युवा कवि संदीप शजर ने किया। बाद में शजर ने साहित्य के लोकप्रिय कुण्डली छंद की रचना प्रकिया की भी विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संस्था के अध्यक्ष अनिल अग्रवंशी, मुख्य सलाहकार राजेश चेतन व सह सचिव रसिक गुप्ता सहित जाने माने रचनाकारों यूसुफ भारद्वाज, सुनहरी लाल तुरंत, बलजीत कौर तन्हा,राजेन्द्र कलकल, हरमिंदर पाल,रजनी अवनी, कृष्ण गोपाल विद्यार्थी व कुमार राघव आदि ने अपनी रोचक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस सत्र का संचालन हास्य कवि रसिक गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ऋतु गोयल व राजेश चेतन ने अपनी लम्बी काव्य यात्रा से जुड़े प्रेरक संस्मरण सुनाने के अलावा नवोदित कवियों की सफलता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए कुछ आवश्यक सुझाव भी दिए। सामूहिक राष्ट्रगान के पश्चात सुरुचिपूर्ण सहभोज के साथ इस दिव्य काव्योत्सव का समापन हुआ।

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