नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/मानसी शर्मा/- दिल्ली में जहांगीरपुरी से शुरू हुआ बुल्डोजर अब रूकने का नाम नही ले रहा है। हालांकि सारी कार्यवाही दिल्ली में अतिक्रमण के नाम पर हो रही है लेकिन अब ये कार्यवाही पूरी तरह से राजनीतिक रूप पकड़ चुकी है। भाजपा एमसीडी के सहारे अतिक्रमण के नाम पर आप के वोट बैंक पर सीधा प्रहार कर एक तीर से दो निशाने साधने के चक्कर में लगी है। तो वहीं आम आदमी पार्टी के नेता यह सब देखते हुए भी कुछ नही कर पा रहे है। कोर्ट से भी अतिक्रमण के नाम पर पार्टी व लोगों को कोई राहत नही मिल रही है। हालांकि आप के नेता अब दिल्ली में गरीबों को उजाड़ने का नारा देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर है और आप पार्टी के नेता केंद्रीय गृहमंत्री से इसे रूकवाने का भी अनुरोध कर रहे हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली की सत्ता दो तरह से बंटी हुई है। जिसमें एक दिल्ली सरकार व दूसरी निगम की सरकार। हालांकि निगम को दिल्ली सरकार के अधीन रखा गया है लेकिन फिर भी दोनो जगहों पर अलग-अलग पार्टी की सरकार होने के चलते विकास कम संघर्ष ज्यादा रहा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी विधानसभा में लगातार दो बार सत्तासीन हो चुकी है। लेकिन फिर भी निगम में भाजपा को चुनौति नही दे पाई है हालांकि पिछले चुनाव में आप ने निगम में अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करा दी थी।
पंजाब में प्रचंड बहुमत के बाद आम आदमी पार्टी की अपेक्षाऐं व ग्राफ काफी बढ़ा हुआ है और कार्यकर्ताओं व नेताओं के हौंसले काफी बुलंद दिखाई दे रहे है। वैसे भी इस बार दिल्ली में निगम में भी आम आदमी पार्टी की लहर दिखाई दे रही है। इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि काफी संख्या में भाजपा व कांग्रेस के नेता आम आदमी पार्टी का दामन थाम रहे हैं। इसी बात को देखते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब भाजपा दिल्ली में निगम को किसी भी सूरत में हाथ से निकलने नही देना चाहेगी। हालांकि लोगों का मानना है कि दिल्ली में जहां भी बुल्डोजर चल रहा है वहां कमोबेश आप का वोट बैंक ही दिखाई दे रहा है। हालाकि ये झोपड़ पट्टी बसने में हमेशा दिल्ली सरकार पर उंगली उठती रही है लेकिन निगम में भाजपा होने के साथ ही भाजपा भी इन अवैध कालोनियों के लिए उतनी ही जिम्मेदार है।
अवैध अतिक्रमण के खिलाफ हो रही कार्यवाही पर उंगली इसलिए उठ रही है कि जब ये लोग यहां अपना डेरा डाल रहे थे तब क्या अधिकारी सोये हुए थे या फिर भ्रष्टाचार के चलते ये झोपड़पट्टी व अवैध कालोनियां बसाई गई जिसमें नेता व अधिकारी बराबर के दोषी है। तो सबसे पहले उन लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होने यह अपराध किया है। आप ज्यादा दूर न जाये अभी द्वारका एक्सप्रेस-वे को लेकर काफी कालोनिया तोड़ी गई। जबकि द्वारका एक्सप्रेस-वे की जमीन करीब दो दशक पहले ही अधिग्रहित कर ली गई थी तो कैसे इस जमीन पर मकान बन गये, कालोनियां कट गई आखिर इनके लिए कौन जिम्मेदार था या फिर वो मासूम गरीब इंसान ही जिम्मेदार है जिसने यहां बिक रही जमीन को खरीदा और मकान बना लिया। फिर वो अधिकारी कैसे बच गये जो करोड़ो जेब में डालकर लोगों को मरने के लिए छोड़ गये।
अब बात करते है दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ हो रही कार्यवाही कैसे राजनीतिक हथियार बन गई। क्यों आप को यह लग रहा है कि अवैध तरीके से रह रहे लोग सही है और निगम जो कार्यवाही कर रहा है वह गलत है। क्या सिर्फ वोट बैंक सुरक्षा ही नेताओं व पार्टियों की जिम्मेदारी है। या फिर दिल्ली व दिल्ली में रह रहे लोगों को अच्छा वातावरण मुहैया कराना उनकी जिम्मेदारी नही है। यह ठीक है कि दिल्ली देश की राजधानी है और दूसरे राज्यों के लोग भी यहां आकर काम कर सकते है लेकिन वो अवैध तरीके से रहे यह कौन बर्दाश्त करेगा। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उनको आशियाना मुहैया कराये ना कि सड़कों व सरकारी जमीनों पर उनके कब्जे करा दे।


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