सपा में क्या गुल खिलायेगी अखिलेश-शिवपाल की अनबन

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सपा में क्या गुल खिलायेगी अखिलेश-शिवपाल की अनबन

-शिवपाल यादव की अमित शाह व सीएम योगी से मुलाकात के बाद भाजपा में जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म -शिवपाल यादव ने बताया औपचारिक मुलाकात, भाजपा के लिए फिल्ड सजा रहे भाजपा विधायक व समधी हरिओम यादव

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/यूपी/शिव कुमार यादव/- यूपी में चुनाव के बाद भी सियासी घमासान थमने का नाम नही ले रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी में अपनी हार को पचा नही पा रहे है जिसकारण उनकी एक बार फिर अपने चाचा शिवपाल यादव से अनबन हो गई है। अपने ही परिवार व पार्टी में लगातार उपेक्षा से आहत पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाऐं अब जोर पकड़ने लगी है। हालांकि शिवपाल सिंह यादव की तरफ से अभी तक इसकी कोई अधिकारिक घोषणा नही की गई है। लेकिन शिवपाल सिंह यादव की गृहमंत्री अमित शाह व योगी आदित्यनाथ से मुलाकात तो यही संकेत दे रही है।

चर्चा है कि शिवपाल यादव ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुकाकात की थी, उसके बाद शिवपाल यादव बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। सीएम योगी और शिवपाल यादव की इस मुलाकात के बाद से सियासी गलियारे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्र बताते हैं कि इटावा से दिल्ली जाने के दौरान शिवपाल ने पूर्व विधायक हरिओम यादव से भी मुलाकात की थी। वहीं, शिवपाल सिंह यादव गुरुवार की सुबह राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम में पहुंचे। माना जा रहा है कि जल्द ही शिवपाल यादव बड़ा एलान कर सकते हैं।

आपको बता दें कि विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है। यह भी कहा कि वक्त आने पर बोलेंगे। शिवपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट हुई है। भविष्य के फैसले पर कहा कि वक्त आने पर इसका खुलासा करेंगे। शिवपाल के इस रहस्यमयी बयान से सियासी हलके में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। सूत्र बताते हैं कि इटावा से दिल्ली जाने के दौरान शिवपाल ने पूर्व विधायक हरिओम यादव से भी मुलाकात की थी। हरिओम रिश्ते में उनके समधी हैं और सपा से नाता तोड़कर भाजपा में चले गए हैं। सियासी गलियारे में इस मुलाकात को भविष्य में होने वाले विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल इस हलचल के बीच भाजपा और सपा के नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह यादव के बेटे रणवीर सिंह यादव की शादी हरिओम यादव के भाई राम प्रकाश नेहरू की बेटी मृदुला यादव के साथ हुई है। हरिओम यादव मृदुला के चाचा हैं और मृदुला सैफई की ब्लॉक प्रमुख और पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव की मां हैं।हरिओम यादव का जन्म फिरोजाबाद जिले में हुआ था। उन्होंने नारायण कॉलेज से कला स्नातक की उपाधि ली। हरिओम यादव सिरसागंज से विधायक रह चुके हैं। वह समाजवादी पार्टी के सदस्य के रूप में सिरसागंज निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

सपा के साथ गठबंधन करने के बाद शिवपाल को उम्मीद थी कि उनकी पार्टी के नेताओं को भी टिकट मिलेगा। उन्होंने करीब 25 नेताओं की सूची अखिलेश यादव को सौंपी। यह कहा कि जो भी जिताऊ हों, उन्हें टिकट दे दें। लेकिन सपा ने सिर्फ उन्हें ही टिकट दिया। ऐसे में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रसपा के कई नेता दूसरे दलों में चले गए। लेकिन, ज्यादातर उनके साथ जुड़कर चुनाव अभियान में उतरे। इसके बाद भी विधायक मंडल दल की बैठक में नहीं बुलाए जाने को वे अपनी उपेक्षा के तौर देख रहे हैं। इन सब बातों से आहत शिवपाल सपा को बड़ा झटका देने के मूड में हैं। इसी क्रम में उनकी सीएम योगी आदित्यनाथ से 20 मिनट की मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पर शिवपाल की योगी से मुलाकात हुई। इसके ठीक बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह भी वहां पहुंचे। इसके बाद उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवपाल के बहू अपर्णा की तरह बीजेपी में जाने के कयास तेज होने लगे हैं।

माना जा रहा है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद शिवपाल यादव को राज्यसभा भेजा जा सकता है। उनकी जगह पर जसवंतनगर सीट से उनके बेटे आदित्य को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। जसवंतनगर न सिर्फ सपा की सेफ सीट है बल्कि वहां शिवपाल का दबदबा है। मोदी-योगी लहर में भी पिछले दो विधानसभा चुनाव से शिवपाल इस सीट से विधायक बनते आ रहे हैं। ऐसे में बेटे के लिए यूपी की सियासत में यह एक सुरक्षित ओपनिंग हो सकती है।

दूसरी संभावना यह है कि शिवपाल को आजमगढ़ से लोकसभा उपचुनाव में भी उतारा जा सकता है। अखिलेश ने आजमगढ़ से सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद 6 महीने के भीतर वहां उपचुनाव होना है। माना जा रहा है कि शिवपाल को वहां से उतारकर बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा पर एक और सकारात्मक बढ़त बनाना चाहती है। शिवपाल की सपा कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ है और आजमगढ़ की सीट सपा की सुरक्षित सीट मानी जाती है। ऐसे में वहां से अगर बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर शिवपाल को उतारा जाता है तो यह सपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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