रूसी विदेश मंत्री के भारत आने का मतलब, पेमेंट सिस्टम आसान बनाने पर होगी चर्चा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 25, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

रूसी विदेश मंत्री के भारत आने का मतलब, पेमेंट सिस्टम आसान बनाने पर होगी चर्चा

-पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूबल में व्यापार पर बन सकती है दोनो देशों में बात

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस हफ्ते भारत आ रहे है। अचानक उनके भारत आगमन को लेकर विश्व भर में राजनीतिक चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया हैहैऔर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का ये दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत रूस के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। यूक्रेन पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाकर टीइंटरनेशनल ट्रेड से अलग-थलग करना शुरू कर दिया है। यानी रूसी विदेश मंत्री के भारत आने का मतलब पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में रूस, भारत के साथ पेमेंट सिस्टम आसान बनाने पर चर्चा कर सकता है और इतना ही नही रूबल में व्यापार पर भी बात बन सकती है।

रायटर्स के मुताबिक, दोनों देश रूसी बैंकों पर पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए बैन के बाद पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने पर चर्चा कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, लावरोव के शुक्रवार को भारत आने की संभावना है। हालांकि, दिल्ली में रूसी दूतावास ने अभी तक इस दौरे की पुष्टि नहीं की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके पास साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार रुपया-रूबल व्यापार प्रणाली स्थापित करने पर विचार कर रही है। भारतीय और रूसी वित्तीय अधिकारियों के बीच चर्चा जारी है। ये भी माना जा रहा है कि रुपया-रूबल ट्रेड विंडो के अलावा, दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के माध्यम से सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी भुगतान सीधे निपटाने सहित कार्ड जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। 24 फरवरी को यूक्रेन पर हुए रूसी हमले के बाद लावरोव की यह तीसरी विदेश यात्रा होगी। इससे पहले लावारोव मार्च की शुरुआत में अपने यूक्रेनी समकक्ष से बातचीत के लिए तुर्की और गुरुवार को चीन जा चुके हैं।

रूसी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड रिलेशन को आसान बनाने के लिए वैकल्पिक मैकेनिज्म को लेकर बात हो सकती है। भारत सरकार के एक अन्य सूत्र ने कहा कि यूक्रेन संकट के बावजूद भारत रूस को भारतीय कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पास पैसे का उपयोग करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।

रूस ने आरबीआई के पास रूसी डिफेंस इक्विपमेंट के लिए करीब 200 करोड़ रुपए भुगतान को बरकरार रखा है। हालांकि, भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि रूस के साथ संबंध बनाए रखने के लिए भारत को पश्चिमी दबाव से कूटनीतिक तौर पर निपटना होगा।

भारत ने हाल ही में यूक्रेन से सप्लाई बंद होने के बाद अप्रैल डिलीवरी के लिए 45,000 टन सनफ्लॉवर ऑयल खरीदने का कांट्रैक्ट किया। पिछले साल भारत ने रूस से एक महीने में करीब 20,000 टन सनफ्लॉवर ऑयल खरीदा था।

केंद्र के एक सीनियर अफसर के मुताबिक, अगर किफायती दरों पर चीजें मिलती है, तो भारत रूस से अधिक वस्तुओं को इंपोर्ट करेगा। वहीं, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर हैप्पीमन जैकब ने कहा कि भारत ने किसी भी तरह से रूस के साथ व्यापार जारी रखने का मन बना लिया है।

रूस, भारत के डिफेंस इक्विपमेंट का मेन सप्लायर है। हालांकि, चीन की तुलना में भारत के साथ इसका कुल सालाना व्यापार कम है। भारत ने रूस के साथ पिछले कुछ सालो में औसतन 9 बिलियन डॉलर (68 हजार करोड़ रुपए) का व्यापार किया। इसमें प्रमुख तौर पर फर्टिलाइजर्स और तेल का व्यापार शामिल है। इसकी तुलना में चीन के साथ भारत का सालाना द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर (करीब 7.56 लाख करोड़ रुपए) से अधिक है।

यूक्रेन पर हमले के बाद भारत ने रूस से किफायती दर पर क्रूड ऑयल खरीदने का सौदा किया है। भारत ने करीब 1.3 करोड़ बैरल ऑयल खरीदे हैं। वहीं, पिछले साल कुल 1.6 करोड़ बैरल ऑयल इंपोर्ट किया गया था। भारत अब स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले रूसी कोयले के इंपोर्ट को भी दोगुना करने पर विचार कर रहा है।

भारत ने वैश्विक मंचो पर यूक्रेन में सीजफायर रोकने की बात दोहरा चुका है, लेकिन यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग में रूस के खिलाफ वोटिंग से परहेज किया है। भारत ने हमले को लेकर रूस की आलोचना तक नहीं की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी कह चुके हैं कि रूस के खिलाफ कार्रवाई करने में भारत की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox