कोरोना नियमों की पालना के चलते अभी तक कोरोना महामरी से अछूता बना हुआ है मलाणा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 10, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

कोरोना नियमों की पालना के चलते अभी तक कोरोना महामरी से अछूता बना हुआ है मलाणा

-हिमाचल के इस गांव में चलता है देवता का शासन, यहां है दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/हिमाचल प्रदेश/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- जहां पूरी दुनिया में कोरोना से हाहाकर मचा हुआ है वही हिमाचल की वादियों में बसा मलाणा गांव अभी भी इस महामारी से अछूता ही बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों की संवेदनशीलता व कोरोना नियमों के पालन को लेकर मानी जा रही है। आधुनिकता के दौर में दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र वाले मलाणा गांव का आज भी अपना ही कानून है। समूचे हिमाचल प्रदेश समेत देश-विदेश में जहां कोरोना महामारी से हाहाकार मचा हुआ है, वहीं कुल्लू जिले के इस गांव को आज तक कोरोना महामारी छू भी नहीं पाई। कोरोना काल के अब तक के 15 माह में इस गांव में एक भी कोरोना का मामला सामने नहीं आया। यह इसलिए मुमकिन हुआ है, क्योंकि पूरे कोरोना काल में यहां के बाशिंदों ने बाहरी लोगों और पर्यटकों पर इस गांव में आने पर रोक लगा रखी है।
                       2350 आबादी वाले इस गांव में देवता जमलू (जमदग्नि ऋषि) का कानून चलता है। गूर के माध्यम से जो देवता जमलू आदेश देते हैं, उसी को माना जाता है। यहां के बाशिंदे खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं। मलाणा गांव के लिए एचआरटीसी की एकमात्र बस सेवा है। कोरोना के चलते वह भी एक साल बाद इसी वर्ष अप्रैल में चली थी, लेकिन अब यह बस फिर से बंद है। आसपास के गांवों के लोगों से भी यहां के लोग गांव के मुख्य गेट के बाहर ही मिलते हैं। पिछले अप्रैल से गांव में बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं है। मलाणा पंचायत के पूर्व प्रधान भागी राम तथा उपप्रधान राम जी ने कहा कि गांव में अभी तक कोरोना का कोई केस नहीं आया है। लोग अपने स्तर पर कोरोना से निपट रहे हैं और उन पर देवता जमलू का पूरा आशीर्वाद है। पंचायत प्रधान राजू राम ने कहा कि कोरोना काल में गांव के लोग भी किसी आपात स्थिति में ही गांव से बाहर निलते हैं, जबकि बाहरी लोगों का गांव के प्रवेश प्रतिबंधित है।
                    यहां बता दें कि कहा जाता है कि महान शासक सिकंदर अपनी फौज के साथ मलाणा क्षेत्र में आया था। भारत के कई क्षेत्रों पर जीत हासिल करने और राजा पोरस से युद्ध के बाद सिकंदर के कई वफादार सैनिक जख्मी हो गए थे। सिकंदर खुद भी थक गया था और वह घर वापस जाना चाहता था, लेकिन ब्यास तट पार कर जब सिकंदर यहां पहुंचा तो उसे इस क्षेत्र का शांत वातावरण बेहद पसंद आया। वह कई दिन यहां ठहरा। जब वह वापस गया तो उसके कुछ सैनिक यहीं ठहर गए और बाद में उन्होंने यहीं अपने परिवार बनाकर यहां गांव बसा दिया।
                     अपराध पर सजा देते हैं देवता- इस गांव में यदि कोई अपराध करता है तो सजा कानून नहीं, बल्कि देवता जमलू देते हैं। देवता गूर के माध्यम से अपना आदेश सुनाते हैं। भारत का कोई भी कानून या पुलिस राज यहां नहीं चलता। अपनी इसी खास परंपरा, रीति-रिवाज और कानून के चलते इस गांव को दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र कहा जाता है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox