38 भारतीय बैंकों के डेटा लीक का दावा, लाखों लेनदेन रिकॉर्ड इंटरनेट पर उजागर

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
July 5, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

38 भारतीय बैंकों के डेटा लीक का दावा, लाखों लेनदेन रिकॉर्ड इंटरनेट पर उजागर

-साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   भारत से जुड़ा एक बड़ा साइबर खतरा सामने आया है। साइबर सिक्योरिटी कंपनी अपगॉर्ड ने दावा किया है कि करीब 38 भारतीय बैंकों का संवेदनशील डेटा इंटरनेट पर लीक हो गया। कंपनी के अनुसार लगभग 2.73 लाख पीडीएफ फाइलें एक असुरक्षित अमेज़न S3 क्लाउड सर्वर पर खुली पड़ी मिलीं, जिनमें ग्राहकों के लेनदेन से संबंधित गोपनीय जानकारी मौजूद थी। रिसर्चर्स का कहना है कि इस लीक में खाताधारकों के नाम, बैंक अकाउंट नंबर, लेनदेन की राशि और संपर्क विवरण जैसी अहम जानकारियां उजागर हुई हैं।

अगस्त में सामने आया मामला
अपगॉर्ड की टीम ने इस डेटा लीक का पता अगस्त के अंत में लगाया। जांच में पाया गया कि अधिकांश दस्तावेज NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस) से जुड़े हुए थे। एनएसीएच एक केंद्रीकृत प्रणाली है जिसका उपयोग बैंक वेतन भुगतान, लोन की किश्तें, और बिजली-पानी जैसे बिलों के नियमित भुगतानों के लिए करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानकारी बिना किसी सुरक्षा उपाय के ऑनलाइन उपलब्ध थी और सितंबर की शुरुआत तक रोजाना नई फाइलें भी जुड़ती रहीं।

किन बैंकों और संस्थाओं का डेटा प्रभावित?
रिपोर्ट के अनुसार इस लीक में कम से कम 38 बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल थे। सबसे ज्यादा दस्तावेजों में ए फाइनेंस (Aye Finance) का नाम सामने आया, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का नाम भी कई रिकॉर्ड्स में मौजूद था। हालांकि, अब तक किसी भी संस्था ने इस लापरवाही की जिम्मेदारी नहीं ली है।

एनपीसीआई ने दी सफाई, संस्थान चुप
इस घटना की जानकारी ए फाइनेंस, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और अन्य संबंधित संस्थानों को दी गई। बाद में मामला CERT-In तक पहुंचा, जिसके बाद सर्वर को सुरक्षित किया गया। एनपीसीआई ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उनके सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं और कोई डेटा लीक नहीं हुआ। दूसरी ओर, ए फाइनेंस और एसबीआई ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

डिजिटल प्राइवेसी पर बढ़ी चिंता
यह घटना एक बार फिर भारत में डेटा सुरक्षा और डिजिटल प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब देश डिजिटल लेनदेन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब ग्राहकों का निजी डेटा कब और कैसे सुरक्षित रहेगा, इस पर स्पष्ट जवाब न मिलना चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा प्रोटेक्शन कानूनों और साइबर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox