“हिंदू संगठनों ने उठाया मुद्दा: मंदिर के पुजारियों को मिले समान वेतन”

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 17, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

“हिंदू संगठनों ने उठाया मुद्दा: मंदिर के पुजारियों को मिले समान वेतन”

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-  इस समय देश की राजनीति केवल जाति, धर्म और एक-दूसरे की बुराई करने की हो गई है। न तो आज किसी को विकास से कुछ लेना-देना है और न ही क्षेत्र या मोहल्ले की समस्याओं को दूर करने की कोई नियत है।

इसी संदर्भ में, आप देख सकते हैं कि दिल्ली जैसे राज्य में जहां केंद्र, राज्य और नगर निगम की सरकारें काम कर रही हैं, ये तीनों केवल खो-खो का खेल खेलकर जनता को जाति, पाती और धर्म में उलझाकर रख रही हैं, जिसे किसी को बताने की आवश्यकता नहीं।

आज दिल्ली के मोती नगर विधानसभा अंतर्गत जखीरा पुल के नीचे प्राचीन शिव मंदिर में हिंदुओं की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इसमें अगल-बगल की विधानसभाओं के कई विद्वान और प्रकांड विद्वान शामिल हुए, जिनमें हिंदू कथावाचक, मंदिरों के पुजारी और कर्मकांडी भी मौजूद थे। स्वस्तिवाचन से सभा की शुरुआत करने के बाद, हिंदुओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वे दिन-रात सनातन धर्म को संजोए रखने के लिए दर-दर भटकते हैं, लेकिन जिनके सहारे दिल्ली की दोनों सरकारें सत्ता में हैं, वे ही हिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं।

एक ओर, जहां ये राजनेता हिंदू-मुस्लिम में दीवार खड़ी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम धर्म के मौलानाओं को एकमुश्त सैलरी दे रहे हैं और हिंदू धर्म के कर्मकांडी ब्राह्मणों और पुजारियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा, ये राजनीतिक दल हिंदू ब्राह्मणों को अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते, जबकि वे इन्हीं दलों में बड़े नेताओं के रूप में मान लिए जाते हैं। यह स्थिति समाज और देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

सभा का संचालन कर रहे विजय तिवारी ने हिंदुओं को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। सभा की अध्यक्षता कर रहे एस के चौबे ने बताया कि वर्तमान में हिंदू ब्राह्मण खुद को अनाथ समझ रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक दल केवल सनातन धर्म का दिखावा कर रहे हैं और वास्तव में इसे समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकारें और विदेशी शक्तियां, जो सनातन के खिलाफ काम कर रही हैं, यह जानती हैं कि जब तक हिंदू अपने पांडित्य और कर्मकांड से समाज में भक्ति का गुणगान करते रहेंगे, तब तक भारत से सनातन को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए, हिंदू ब्राह्माणों को अपमानित करके और वित्तविहीन करके उन्हें कमजोर किया जा रहा है। इसका परिणाम यह होगा कि वे अन्य कामों में लग जाएंगे और अन्य धर्मों को फैलने का अवसर मिलेगा।

यह सौतेला व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यह संघर्ष सनातन शंखनाद समन्वय समिति द्वारा शुरू किया जाएगा, जो दिल्ली के तमाम हिंदू, ब्राह्मण संगठनों, सनातनी संगठनों और हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले संगठनों को एकजुट करके सरकार से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया गया है, ताकि माननीय न्यायालय से ऐसे योजनाओं को बंद करने या सभी धर्मों के लोगों को समान वेतन देने का आदेश पारित किया जा सके।

इस सभा के मार्गदर्शक पंडित श्रीनाथ पाण्डेय ने सभी हिंदुओं को एकजुट रहने का आह्वान किया और इस आंदोलन को जनआंदोलन में बदलने का आग्रह किया। शास्त्री मुक्ति प्रसाद पाठक, उमा शंकर त्रिपाठी, शास्त्री काली प्रसाद तिवारी, पंडित अवधेश पांडेय, पंडित मुरारी लाल शर्मा, पंडित पवन भारद्वाज, पंडित मिलित कृष्ण दूबे, पंडित सर्वेश मिश्रा, पंडित सुरेश चंद्र शास्त्री सहित कई विभूतियों ने अपने विचारों से सभा में बैठे हिंदुओं में नई ऊर्जा का संचार किया।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox