हरियाणा की बेटी मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में रचा इतिहास,  श्री कृष्ण की नसीहत आई काम

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April 14, 2026

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हरियाणा की बेटी मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में रचा इतिहास,  श्री कृष्ण की नसीहत आई काम

-प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेता को दी बधाइयां

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- पेरिस ओलंपिक में भारत को पहला पदक मिलते ही देशभर में जश्न का माहौल शुरु हो गया है। पूरे देश के लोग पेरिस ओलंपिक में इतिहास रचने वाली मनु भाकर को बधाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी ओलंपिक विजेता को बधाई दी है। वहीं, पदक जीतने के बाद वो पहली बार मीडिया से रूबरू हुई। उन्होंने अपनी इस जीत का कारण श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण के नसीहत को बताया है। साथ ही उन्होंने पहली बार टोक्यो ओलंपिक में मिली हार के बाद का अनुभव साझा किया है। गौरतलब है कि, हरियाणा की इस बेटी ने मात्र शूटिंग में 12 साल के सूखे को खत्म ही नही किया है बल्कि कांस्य पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट भी बन गई हैं। मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक जीत लिया है।

श्री कृष्ण की नसीहत आई काम
ओलंपिक में इतिहास रचने वाली मनु भाकर ने कहा कि उन्हें पदक जीतने में श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण की नसीहत काम आई।उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कहा था कि, सिर्फ अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करो। मनु ने कहा, “गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से सिर्फ अपने काम पर ही फोकस करने को कहा था।वही सब मेरे दिमाग में भी चल रहा था। मैं सिर्फ अपना बेस्ट प्रदर्शन करने पर ध्यान देती हैं। मैं अपने भाग्य को तो कंट्रोल नहीं कर सकती हूं।”

इसके साथ ही उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ ही अपने कोच का भी धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा, “हमने कड़ी मेहनत की है। हमें बाकी सब भाग्य और भगवान पर छोड़ देना चाहिए। हम जितना कर सकते हैं, करेंगे। मेरे साथ खड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद (सभी दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का)। उन्हीं की बदौलत मैं यहां मजबूती से खड़ी हूं।“

टोक्यो ओलंपिक में हार का अनुभव कैसा रहा
22 वर्षीय ओलंपिक विजेता मनु भाकर टोक्यो में ओलंपिक में क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। जिसके बाद उसकी आंखों से आंसू निकलते हुए पूरे दूनिया ने देखा था। उसे हार पर और उस हार से उपजी निराशा को लेकर उन्होंने कहा कि “टोक्यो ओलंपिक मेरे लिए निराशाजनक रहा था, लेकिन जो बीत गया वो बीत गया। यह मेडल हम सभी के लिए है। यह हमेशा टीम वर्क होता है। मैं भारत के लिए यह मेडल जीतने के लिए सिर्फ एक माध्यम हूं।”

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