हमारे सौरमंडल में पंहुचा शैतान धूमकेतु, 71 साल में एक बार देता है दिखाई

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हमारे सौरमंडल में पंहुचा शैतान धूमकेतु, 71 साल में एक बार देता है दिखाई

-भारत में सूरज छिपने के बाद पश्चिमी क्षितिज में देगा दिखाई, दुनिया की टिकी निगाहें

वाशिंगटन/शिव कुमार यादव/- 71 साल बाद एक बार फिर शैतान धूमकेतु हमारे सौरमंडल में पंहुचा है। पिछली बार इसे 1954 में पृथ्वी से देखा गया था। दरअसल धूमकेतु 12पी/पोंस-ब्रूक्स, जिसे ’मदर ऑफ ड्रेगन’ या शैतानी धूमकेतु भी कहा जाता है। ये धूमकेतु धरती के नजदीक से गुजर रहा है, ऐसे में ये उत्तरी गोलार्ध के आसमान में दिखाई देता है। स्टारगेजर्स धरती के पास से गुजरते हुए इसकी एक झलक देख सकते हैं। इसे सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में क्षितिज के करीब देखा जा सकता है। यह धूमकेतू करीब 30 किलोमीटर व्यास में फैला होता है और इसे सौर मंडल की यात्रा करते समय देखा जा सकता है। इसे बिना किसी उपकऱण की मदद के खुली आंखों से देखा जा सकता है।

पृथ्वी के और अधिक करीब आने पर यह धूमकेतु रात में ज्यादा समय तक और अधिक चमकीला दिखाई देगा। धूमकेतु 12पी/पोंस-ब्रूक्स को जूपिटर फैमिली के धूमकेतु के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसकी कक्षा बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से प्रभावित है। यह आम तौर पर मंगल की कक्षा के चारों ओर पेरीहेलियन (सूर्य के निकटतम दृष्टिकोण) तक पहुंचता है और इसी दौरान पृथ्वी पर पर्यवेक्षकों को दिखाई दे सकता है।
      इसे शैतान धूमकेतु भी कहा जाता है, खगोलविदों ने इसका नाम पॉप संस्कृति शो “गेम ऑफ थ्रोन्स“ से लिया है। धूमकेतु “कप्पा-ड्रेकोनिड्स“ का मूल निकाय भी बनाता है, जो एक छोटा वार्षिक उल्का पिंड है जो 29 नवंबर से 13 दिसंबर में सक्रिय होता है। बर्फ, धूल और चट्टानी सामग्री से बना 12पी/पोंस-ब्रूक्स जैसे ही सूर्य के करीब पहुंचता है, गर्मी के कारण धूमकेतु के अंदर की बर्फ ठोस से गैस में बदल जाती है। गैस धूमकेतु की सतह से धूल को अपने साथ खींचकर बाहर निकल जाती है। वे एक बड़े बादल और एक पूंछ का निर्माण करते हैं जिसे सौर हवा द्वारा सूर्य से दूर धकेल दिया जाता है।

जून में होगा धरती के सबसे करीब
पृथ्वी के सबसे करीब इसका आगमन जून 2024 में होगा, हालांकि तब इसे देखना संभव नहीं होगा। इसे देखने का सबसे सही टाइम मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में होती हैं। इसे शाम ढलने के बाद देखा जाना चाहिए। अंधेरे आसमान में पश्चिमी क्षितिज के ऊपर ये स्पष्ट दिखता है। एक छोटी दूरबीन से इसे अच्छे से देख सकते हैं। कई दफा नंगी आंखों से भी इसकी झलक मिल सकती है। धूमकेतु 12पी/पोंस-ब्रूक्स खगोलविदों को इसकी उपस्थिति की भविष्यवाणी करने और समय के साथ इसके व्यवहार का अध्ययन करने की अनुमति देती है, जिससे धूमकेतु की गतिशीलता और सौर मंडल के विकास में जानकारी मिलती है।

एक्सपर्ट का कहना है कि सूरज छिपने के बाद पश्चिम में आसमान पर 15 डिग्री पर इसे देखा सकता है। करीब आधे घंटे तक ये दिख रहा है, ये समय और भी बढ़ सकता है। अप्रैल को अमेरिका समेत कई देशों में सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण वाले इलाकों में धूमकेतु को दिन में भी देखा जा सकेगा। इस धूमकेतु को 1812 में खोजा गया था। हर 71 साल में यह एक बार सूर्य की परिक्रमा करता है। इसे आखिरी बार 1954 में पृथ्वी से देखा गया था। इस धेमकेतु में लगातार आण्विक विस्फोट होते रहते हैं।

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