सहस्त्रधारा में बादल फटने से मची तबाही, टपकेश्वर महादेव मंदिर जलमग्न

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सहस्त्रधारा में बादल फटने से मची तबाही, टपकेश्वर महादेव मंदिर जलमग्न

-करलीगढ़ नाले का पानी बाजार में घुसा, होटल-दुकानें बहीं, 2 लोग लापता -IMD ने जारी किया रेड अलर्ट, प्रशासन हाई अलर्ट पर – 100 से ज्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए -CM धामी ने जताई चिंता, सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद

उत्तराखंड/देहरादून/अनीशा चौहान/- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा में सोमवार रात करीब 11:30 बजे बादल फटने की घटना से भारी तबाही मच गई। तेज बारिश के कारण करलीगढ़ नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया और मलबा बहकर मुख्य बाजार में घुस गया। इस दौरान कई दुकानें, होटल और वाहन बह गए। वहीं, टपकेश्वर महादेव मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक किसी की मौत की सूचना नहीं है, लेकिन दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

प्राकृतिक आपदा का केंद्र बना सहस्त्रधारा
सहस्त्रधारा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और गंधक युक्त जल धाराओं के लिए प्रसिद्ध है। सोमवार रात अचानक बादल फटने से पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन हुआ, जिससे करलीगढ़ नाले का पानी उफान पर आ गया। मलबे और तेज बहाव ने मुख्य बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। दो-तीन बड़े होटल और सात-आठ दुकानें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा एक आवासीय मकान और एक पशुशाला भी मलबे में दब गई, जिसमें करीब 15-20 पशुओं के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

टपकेश्वर महादेव मंदिर में घुसा पानी
घटना के बाद सुबह होते-होते तमसा नदी भी उफान पर आ गई, जिसने टपकेश्वर महादेव मंदिर को घेर लिया। मंदिर के पुजारी आचार्य बिपिन जोशी ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे से पानी का स्तर तेजी से बढ़ा और गुफा में घुस गया। शिवलिंग तक पानी पहुंच गया, लेकिन गर्भगृह सुरक्षित है। एक भक्त ने बताया कि पानी का स्तर 10 से 12 फीट तक बढ़ गया था और रस्सियों के सहारे भक्तों ने बाहर निकलकर जान बचाई। वर्तमान में मंदिर परिसर में करीब दो फीट तक मलबा जमा हो गया है।

मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) ने देहरादून और टिहरी गढ़वाल के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रति घंटे 15 मिमी से अधिक बारिश, आंधी और 62-87 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। यह स्थिति 20 सितंबर तक बनी रह सकती है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा और बढ़ जाएगा। वहीं, जिला प्रशासन ने बताया कि सूचना मिलते ही एसडीएम कुमकुम जोशी रात में ही मौके पर पहुंच गईं और इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) के तहत सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

100 से ज्यादा लोग निकाले गए सुरक्षित
SDRF और NDRF की टीमों ने जेसीबी और अन्य उपकरणों के साथ त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अब तक 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, दो लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा का असर यातायात पर भी पड़ा है। देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवाजाही बाधित हो रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सहस्त्रधारा में भारी बारिश के कारण कुछ दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जिला प्रशासन, SDRF और पुलिस राहत कार्यों में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से हालात पर नजर बनाए हुए हैं और ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करते हैं। इसी के साथ प्रशासन ने देहरादून जिले के सभी स्कूलों (कक्षा 1 से 12 तक) और आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग के अलर्ट का पालन करें।

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