मानसी शर्मा /- तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए धुंआधार चुनाव प्रचार अभियान मंगलवार शाम 5 बजे थम जाएगा। जहां चुनावी मौसम अन्य चार राज्यों – मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम की तुलना में काफी लंबा रहा। इन चारों राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है।
विपक्षी दलों ने सत्ता में वापसी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी
वहीं भारत राष्ट्र समिति लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है। जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए जी जान लगा रही है। इसी के साथ भाजपा ने भी सत्ता में आने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसा बताया जा रहा है कि आगामी चुनाव में बीआरएस प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनके पुत्र केटी रामा राव, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी और भाजपा के लोकसभा सदस्य बंदी संजय कुमार, डी. अरविंद और सोयम बापूराव समेत 2,290 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। केसीआर कामारेड्डी और गजवेल से अपनी किस्मत आजमाएंगे, वहीं रेवंत रेड्डी कोडंगल और कामारेड्डी से चुनाव लड़ेंगे।
क्या है कांग्रेस की रणनीति
गौरतलब है कि तेलंगाना चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मंगलवार को सोनिया गांधी भी रोड शो करके वोटरों को लुभाने की कोशिश करेंगी। लेकिन इन बड़े नेताओं के बीच कांग्रेस ने तेलंगाना में एक नए फॉर्मूले पर काम कर रही है। जो इसके लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकता है। दरअसल, कांग्रेस ने यहां के वोटरों को अपनी तरफ खींचने के लिए कर्नाटक के सीएम, डिप्टी सीएम समेत करीब 3-4 नेताओं को यहां उतार दिया है। कर्नाटक सरकार का 75% मंत्रिमंडल तेलंगाना में चुनावी प्रचार संभाले हुए है।


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