श्रीलंका/अनीशा चौहान/- श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार, 22 अगस्त को कोलंबो में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई जब वे अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े मामले में बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी ने श्रीलंका की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि वे लंबे समय तक देश के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं।
किस कारण हुई गिरफ्तारी?
सूत्रों के मुताबिक, विक्रमसिंघे पर राष्ट्रपति कार्यकाल (2022-2024) के दौरान सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। यह मामला उनके व्यक्तिगत यात्राओं और सरकारी फंड के इस्तेमाल से जुड़ा है। 2022 के आर्थिक संकट के दौरान उन्होंने कार्यवाहक और बाद में पूर्णकालिक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला था। इस दौरान उन्होंने आईएमएफ (IMF) के साथ ऋण पुनर्गठन और आर्थिक स्थिरीकरण के कई उपाय लागू किए थे।
चुनाव में हार और बदलता राजनीतिक समीकरण
रानिल विक्रमसिंघे ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी हिस्सा लिया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे तीसरे स्थान पर रहे, जबकि नेशनल पीपल्स पावर (NPP) गठबंधन के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारी जीत हासिल की। दिसानायके ने चुनाव में भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उनकी जीत को जनता की बदलाव की मांग और पारदर्शिता की ओर कदम माना गया।
बड़ा राजनीतिक झटका
विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी श्रीलंका की मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था और विपक्ष दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है। एक तरफ यह कार्रवाई श्रीलंका में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैये का संकेत है, वहीं दूसरी ओर यह पूर्व राष्ट्रपति की राजनीतिक साख पर गहरा असर डाल सकती है।


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